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इराक़ हमले की बरसी पर विरोध प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ पर हमले को दो बरस पूरे होने पर दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. इन विरोध प्रदर्शनों में हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया है. अमरीका, ब्रिटेन के अलावा यूरोप के कई देशों, जापान और ऑस्ट्रेलिया में ये विरोध प्रदर्शन हुए हैं. लेकिन अपने रेडियो संदेश में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश ने इराक़ पर हमले को सही ठहराते हुए कहा है कि 'हमला एक क्रूर शासन के ख़ात्मे, लोगों की आज़ादी और दुनिया को सुरक्षित बनाने के लिए' किया गया था. जापान में अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस दौरे पर हैं और वहाँ साढ़े चार हज़ार लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. जापान ने इराक़ पर हमले के लिए अपने साढ़े पाँच सौ दस्ते भेजे थे. इसी तरह ऑस्ट्रेलिया ने भी इराक़ हमले में साथ दिया था. और विरोध प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया में भी हुए हैं. इसके अलावा ग्रीस और तुर्की से भी प्रदर्शन की ख़बरें मिली हैं. अमरीका-ब्रिटेन बड़े विरोध प्रदर्शन जहाँ हुए उनमें ब्रिटेन एक था.
लंदन में हुए प्रदर्शन के बारे में आयोजकों का दावा था कि इसमें एक लाख लोगों ने भाग लिया लेकिन प्रशासन का कहना है कि 45 हज़ार लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल थे. प्रदर्शन में शामिल ब्रिटेन के दो पूर्व सैनिकों ने अमरीकी दूतावास के सामने दो ताबूत रख दिए जिसमें लिखा था, "एक लाख लोग मारे गए." अमरीका के कई शहरों में इराक़ पर किए गए हमले के ख़िलाफ़ रैलियाँ निकाली गईं. हज़ारों प्रदर्शनकारी न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को और शिकागो के अलावा कई शहरों में प्रदर्शन हुए. इसमें प्रशासन के ख़िलाफ़ नारे लगाए जा रहे थे और कई जगह अमरीकी राष्ट्रध्वज से ढँके हुए ताबूत साथ में रखा गया था. |
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