|
ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा घटाने पर बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के बीस विकसित और विकासशील देशों के ऊर्जा और पर्यावरण मंत्री वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा घटाने पर चर्चा कर रहे हैं. इस बैठक का मकसद आर्थिक विकास पर असर डाले बिना ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा घटाना है. पर्यवेक्षकों का कहना है कि उम्मीद जताई जा रही है कि बैठक का ध्यान नई तकनीक और साफ़ इंधन के इस्तेमाल से प्रदूशण को घटाने पर केंद्रित होगा. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं होता तो बड़े विकासशील देशों - भारत, चीन, ब्राज़ील के आर्थिक विकास के दौरान ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बहुत बढ़ सकती है और उसका पृथ्वी के जलवायु पर बुरा असर पड़ेगा. इस बैठक का आयोजन ब्रिटेन ने किया है जो इस समय विश्व के आठ सबसे विकसित देशों के संगठन जी-8 की अध्यक्षता कर रहा है. बीबीसी के विज्ञान संवाददाता रोलां पेस का कहना है कि बैठक का उद्देश्य ये तय करना है कि क्योटो संधि के बाद अब क्या किया जाए. उनका कहना है कि क्योटो संधि तो मात्र पहला कदम था और अब ध्यान इस ओर केंद्रित है कि वर्ष 2012 के बाद जिन औद्योगिक देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं उन्हें तो हानिकारक गैसों को मात्रा घटानी ही होगी. लेकिन दुनिया में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा अब 1990 से कहीं बढ़ गई है और अनुमान लगाया गया है कि यदि कोई कदम न उठाए गए तो अगले 25 साल में इनकी मात्रा 60 प्रतिशत बढ़ जाएगी. जिन क्षेत्रों में इनकी मात्रा बढ़ेगी, वे हैं विकासशील देश - भारत, चीन और ब्राज़ील. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||