|
ब्रिटेन में आतंकवाद विरोधी क़ानून पास | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रितानी संसद के ऊपरी सदन हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में घंटों तक चली बहस के बाद आख़िरकार आतंकवाद विरोधी क़ानून को पास कर दिया है. इस क़ानून पर 30 घंटे से भी ज़्यादा समय तक बहस चली. क़ानून को पास करने पर बना गतिरोध उस समय ख़त्म हुआ जब विपक्षी कंज़रवेटिव पार्टी ने प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के समझौता प्रस्ताव को मान लिया. ब्लेयर ने यह वादा किया कि सांसद एक साल बाद इस विधेयक की समीक्षा कर सकेंगे. उसके बाद ही क़ानून पास होने का रास्ता साफ़ हो पाया. विपक्षी कंज़रवेटिव पार्टी ने इसे अपनी जीत बताया है. विपक्षी नेता माइकल हॉवर्ड ने प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर का वह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने कहा था कि वे इस विधेयक को लेकर व्यक्त की जा रही चिंता पर गौर करेंगे. लंबी बहस हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में घंटों तक चली बहस के बावजूद सहमति नहीं बन पाई थी. बाद में प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने राजनीतिक गतिरोध ख़त्म करने की अपील की.
हालाँकि हाउस ऑफ़ कॉमंस ने इस विधेयक को पास कर दिया था लेकिन हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में कई सदस्यों का कहना था कि इससे सदियों पुरानी नागरिक स्वतंत्रता को ख़तरा पैदा हो गया है. मामला मुख्य रूप से तीन जगहों पर अटक रहा था. पहला ये कि इस क़ानून की समीक्षा का अधिकार न्यायाधीशों के हाथ में हो, किस तरह के सबूत हों जिनके आधार पर किसी व्यक्ति को इस क़ानून के दायरे में लाया जाए और एक ऐसा प्रावधान जिसके तहत ये क़ानून एक साल के बाद ख़ुद ही वैध नहीं रह जाए. सबसे ज़्यादा टकराव था इस आख़िरी मामले पर जिसे सनसेन क्लाज़ का नाम दिया जा रहा था और इसी मामले पर हाउस ऑफ लार्ड्स इसे तीन बार वापस लौटा चुका था. सरकार को जल्दी इसलिए थी क्योंकि 14 मार्च को इस क़ानून की अवधि समाप्त हो रही थी और उसके बाद इसके तहत जेलों में बंद सरकार की नज़रों में 10 ख़तरनाक चरमपंथियों को छोड़ना पड़ता. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||