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इराक़ी क़ैदियों से दुर्व्यवहार पर जेल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दो साल पहले इराक़ में क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में तीन ब्रितानी सैनिकों को जेल की सज़ा सुनाई गई है और उन्हें सेना से भी निकाल दिया गया है. ब्रितानी सेना के अध्यक्ष जनरल सर माइक जैक्सन ने इस घटना के लिए माफ़ी भी मांगी है. उन्होंने कहा है कि जिनके साथ दुर्व्यवहार हुआ वे उनसे और इराक़ी जनता से माफ़ी माँगते हैं. ब्रितानी रक्षा मंत्री जैफ़ हून ने कहा है कि वे इस घटना से चिंतित है लेकिन अधिकतर सैन्य अधिकारी नियमों का पालन कर रहे हैं. यह सज़ा जर्मनी की एक सैन्य ट्रिब्यूनल ने सुनाई है. हालांकि सैनिकों के वकील ने कहा है कि इन सैनिकों को 'बलि का बकरा' बनाया गया.
इराक़ के बसरा में हुए इस दुर्व्यवहार की तस्वीरें पूरी दुनिया में दिखाई गईं थीं. ये तस्वीरें उस समय प्रकाश में आईं जब तस्वीरें खींचने वाले चौथे सैनिक ने इसे प्रिंट करवाने के लिए एक लैब में दिया. एक दूसरी अदालत में उस सैनिक ने स्वीकार किया था कि तस्वीरें उसी ने खींची थीं. उस सैनिक को भी कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ा और उसे 18 महीने जेल की सज़ा सुनाई गई है. ब्रितानी सेना के अध्यक्ष जनरल सर माइक जैक्सन ने कहा है कि वे इस घटना की जाँच के आदेश दे रहे हैं जिससे कि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो. उन्होंने कहा कि इसे ब्रितानी सेना के एक अपवाद के रुप में देखा जाना चाहिए. |
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