| ब्रितानी सैनिकों के दुर्व्यवहार की तस्वीरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के सैन्य अधिकारियों ने ऐसी कुछ तस्वीरें जारी की है जिनमें ब्रितानी सैनिकों को इराक़ में नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार करते दिखाया गया है. ये तस्वीरें जर्मनी के एक शहर में तीन ब्रितानी सैनिकों के कोर्ट मार्शल के दौरान जारी की गईं. जर्मनी में एक ब्रितानी सैन्य अड्डे पर इन सैनिकों का कोर्ट मार्शल हो रहा है जिसमें इराक़ी क़ैदियों पर अत्याचार करने के आरोपों की सुनवाई हो रही है. इनमें से दो सैनिकों ने इन आरोपों से इनकार किया है जबकि एक सैनिक ने एक इराक़ी क़ैदी को पीटने की बात स्वीकार की है. इन तस्वीरों में कथित तौर पर सैनिकों को नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार करते हुए दिखाया गया है. ये 22 तस्वीरें मई, 2003 में इराक़ी शहर बसरा में हुई लूटपाट के बाद ली गई बताई गई हैं. एक तस्वीर में एक ब्रितानी सैनिक एक इराक़ी नागरिक पर खड़े होकर संभवतः उसे पीटते हुए नज़र आता है. एक अन्य तस्वीर में एक नागरिक को एक ट्रक से बाँधकर लटकाया हुआ है और कुछ अन्य तस्वीरों में कुछ इराक़ियों को नग्न अवस्था में दिखाया गया है. अभियोग पक्ष ने इन्हें आश्चर्यजनक और घिनौनी तस्वीरें बताया है. बसरा एक ब्रितानी रेजीमेंट के सैनिकों पर बसरा के एक राहत शिविर में क़ैदियों को यौन संबंधों के लिए मजबूर करने के आरोपों समेत नौ आरोप लगाए गए हैं. तस्वीरों में ब्रितानी सैनिकों को इराक़ियों के साथ मारपीट करते हुए भी दिखाया गया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ब्रिटेन की सेना किसी भी तरह के विवाद से बचने की पूरी कोशिश करेगी. ब्रितानी सेना के प्रमुख सर माइकल जैक्सन ने टेलीविज़न पर दिए एक बयान में इराक़ी बंधकों के साथ हुए दुर्व्यवहार की निंदा की है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इराक़ में तैनात 65 हज़ार ब्रितानी सैनिकों में से सिर्फ़ कुछ ही सैनिकों पर इराक़ियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप है. सर माइकल जैक्सन ने कहा, "मुझे सैन्य जाँच और न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है." इराक़ की अबू ग़रेब जेल में पिछले साल क़ैदियों के साथ मारपीट और यौन दुर्व्यहार के मामले में अभी कुछ ही दिनों पहले एक अमरीकी सैनिक चार्ल्स ग्रेनर को दस साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी. ब्रितानी सैनिकों की कोर्ट मार्शल सुनवाई और ये तस्वीरें बहुत ही संवेदनशील वक़्त पर सामने आई हैं क्योंकि दो सप्ताह से भी कम समय में इराक़ की जनता देश में सद्दाम हुसैन के शासन के ख़त्म होने के बाद पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव में हिस्सा लेगी. |
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