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अबू ग़रेब जेल में अमानवीय व्यवहार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में साल भर विस्फोट, अपहरण और मौतों के बीच कुछ ऐसी तस्वीरें आईं जो दिल दहलाने वाली थी. तस्वीरों में इराक़ी कैदियों के साथ जेल में किए जा रहे अमानवीय व्यवहार को दिखाया गया था. जेल था अबू ग़रेब और कैदियों को प्रताड़ित करने वालों में शामिल थे अमरीकी और ब्रिटिश सैनिक. तस्वीरों से साफ लग रहा था कि ये प्रताड़ना पूछताछ के लिए नहीं थी बल्कि आनंद लेने के लिए थी. कैदियों को नीचा दिखाने के लिए थी. अमरीकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट ने ये तस्वीरें छापी जिसमें दिखाया गया कि एक महिला सैनिक इराक़ी कैदी के गले में पट्टा डालकर उसे खींच रही हैं. कैदियों को नंगा कर उनका ढेर बनाया जा रहा है. नंगे कैदियों को बिजली के झटके दिए जा रहे हैं. उनसे यौन क्रिया करने को कहा जा रहा है और कुत्तों से डराया जा रहा है. कुल मिलाकर वो किया जा रहा था जो सैनिकों के मन में आता था.
मामले ने तूल पकड़ा और दुनिया के कई देशों नें नाराज़गी जताई. अमरीकी रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफेल्ड ने घटना पर अफसोस जताया और बाद में राष्ट्रपति बुश ने स्वयं इस मामले पर दुख प्रकट किया. जांच हुई और सैनिकों पर कार्रवाई भी. अभी भी छह अमरीकी सैनिकों के ख़िलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई चल रही है. मामले को ठंडा करने के लिए अबू गरैब से 100 इराक़ी कैदियों को रिहा भी कर दिया गया. बाद में जेल को तोड़ने की भी बातें आई लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक नाम आया महिला सैनिक प्राइवेट लिंडी का जो एक नंगे इराक़ी कैदी को खींच कर ले जा रही थी. उनके ख़िलाफ मामला चल रहा है. सवाल कई मुद्दो पर उठे. जेलों में कैदियों के साथ व्यवहार पर, अमरीकी सैनिकों के प्रशिक्षण पर, मानवाधिकार पर मगर सवालों ने जेल की चहारदीवारियों के भीतर ही दम तोड़ दिया. इराक़ियों के साथ बर्ताव शक के घेरे में
इस मामले में निलंबित किए एक सैनिक स्टाफ़ सार्जेंट चिप फ्रेडरिक का कहना था कि जिस तरह से सेना उस जेल को चला रही है बस उसी तरीक़े से यह बदसलूकी हुई है. उन्होंने कहा"हमें किसी तरह की मदद नहीं मिलती और न ही हमें किसी तरह का विशेष प्रशिक्षण दिया गया. मैं अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इस बारे में कुछ बातों की पुष्टि चाहता था, ख़ासतौर से नियम-क़ानूनों के बारे में." चिप फ्रेडरिक का कहना था कि उसने क़ैदियों के साथ बर्ताव के मानदंड निर्धारित करने वाले जेनेवा समझौते को निलंबित होने से पहले तक नहीं पढ़ा था. इराक़ में अमरीकी अभियान के उप मुखिया ब्रिगेडियर जनरल मार्क किम्मिट ने सीबीएस टेलीविज़न से कहा कि वह अपने सैनिकों का ऐसा बर्ताव देखकर बहुत दुखी हुए हैं. |
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