| ब्रिटेन में 200 'आतंकवादियों' की आशंका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन के पूर्व पुलिस प्रमुख सर जॉन स्टीवेंस ने कहा है कि ओसामा बिन लादेन के अल क़ायदा संगठन से प्रशिक्षण प्राप्त क़रीब 'दो सौ आतंकवादी' ब्रिटेन में मौजूद हैं. एक अख़बार न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड के साथ एक ख़ास इंटरव्यू में सर जॉन स्टीवेंस ने कहा कि आतंकवादियों के छोटे-छोटे नेटवर्क क़स्बों और शहरों में फैल गए हैं. "यह बहुत ज़रूरी है कि सरकार के आतंकवाद विरोधी प्रस्तावों को क़ानूनी जामा पहना दिया जाए." सर जॉन स्टीवेंस क़रीब पाँच सप्ताह पहले मैट्रोपोलिटन पुलिस प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे. उन्होंने कहा, "यह क़ानून बनाने में जितनी देरी होगी उतना ही आतंकवादियों को सुविधा होगी." बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सर जॉन स्टीवेंस की इस टिप्पणी ने इस राजनीतिक बहस को और हवा दे दी है कि देश में संदिग्ध आतंकवादियों से किस तरह निबटा जाए. 'ख़तरा' अमरीका पर 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों के बाद और इराक़ युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने अमरीकी विदेश नीति को जिस तरह समर्थन किया है उसके बाद ब्रिटेन इस्माली कट्टरपंथियों के लिए एक निशाना बन गया है.
इन ख़तरों से निपटने के लिए सरकार ने जो क़दम उठाए हैं उन पर भी गर्मागरम बहस हो रही है. ब्रिटेन का आतंकवाद निरोधक अधिनियम' अधिकारियों को ऐसी अधिकार देता है जिसके तहत वे संदिग्ध व्यक्तियों को बिना मुक़दमे के हिरासत में रख सकते हैं. ऐसा वो इस आधार पर कर सकते हैं कि उनके ख़िलाफ़ सबूत बहुत संवेदनशील ंहै और उन्हें अदालत के सामने पेश नहीं किया जा सकता. ये अधिनियम सत्ताधारी लेबर पार्टी के कुछ सांसदों के विरोध के बावजूद निचले सदन हाऊस ऑफ़ कॉमंस में पारित हो चुका है मगर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह क़ानून मानवाधिकारों का उल्लंघन है. ब्रिटेन की मैट्रोपोलिटन पुलिस के पूर्व प्रमुख सर जॉन स्टीवन का कुछ और ही तर्क है. उनके मुताबिक़ ब्रिटेन के शहरों में ऐसे लोगों का जाल बिछ गया है जो बम हमले और हत्या करने के लिए तैयार हैं और ऐसे लोगों की संख्या उन्होंने क़रीब 200 बताई है. हालाँकि उन्हें इस अधिनियम को लेकर कुछ आपत्तियाँ ज़रूर हैं मगर साथ ही वे कहते हैं कि इस अधिनियम को पारित करने में देरी का मतलब है आतंकवादियों को फ़ायदा पहुँचाना. आतंकवाद निरोधक अधिनियम को लेकर काफ़ी विवाद चल रहा है और अब इन बयानों से बहस और तेज़ होने की संभावना है. |
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