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'सीरिया लोकतांत्रिक बदलाव में रोड़ा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने सीरिया पर आरोप लगाया है कि वह मध्य पूर्व में लोकतांत्रिक बदलाव के रास्ते में रोड़ा बन रहा है. अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने सीरिया पर आरोप लगाया कि उसकी ज़मीन का इस्तेमाल इराक़ में विद्रोहियों के समर्थन के लिए हो रहा है. उन्होंने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि सीरिया स्थित इस्लामिक जेहाद का मुख्यालय इसराइली शहर तेल अवीव में हुए हमले में शामिल था. इस बीच टाइम पत्रिका के साथ इंटरव्यू में सीरिया के राष्ट्रपति असद ने कहा है कि उनकी सेना अगले कुछ महीनों में लेबनान से हट सकती है. उन्होंने कहा कि उनका यह फ़ैसला लेबनॉन की सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ इस पर भी निर्भर करता है कि सीरिया की सुरक्षा को कोई ख़तरा न हो. सीरियाई राष्ट्रपति ने पहली बार ऐसे संकेत दिए हैं कि उसकी सेनाएँ लेबनान से हट सकती हैं. संयुक्त राष्ट्र भी यही मांग करता आया है जिसका अमरीका और फ्रांस ने समर्थन किया है. संकट की शुरुआत सीरियाई सैनिकों के हटाए जाने को लेकर लेबनान में दो सप्ताह चले सरकार विरोधी धरने-प्रदर्शनों के बाद वहाँ की सरकार ने इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
इस फ़ैसले की घोषणा प्रधानमंत्री उमर करामी ने संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बहस के दौरान की थी. प्रदर्शनकारी सरकार के ख़िलाफ़ राजधानी बेरूत में संसद के पास धरना दिए हुए थे. प्रदर्शनकारी सीरियाई सेना और गुप्तचर अधिकारियों की लेबनान से वापसी चाहते हैं. पिछले क़रीब तीस साल से 15 हज़ार सीरियाई सैनिक लेबनान में मौजूद हैं. क़रीब एक पखवाड़े पहले लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक़ हरीरी की एक बम विस्फोट में मौत के बाद से वहाँ राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था. लेबनान के विपक्षी दलों ने हरीरी की मौत में सीरिया का हाथ होने का आरोप लगाया था. जबकि सीरिया ने इस विस्फोट में किसी भी तरह का हाथ होने से इनकार किया था. अमरीका ने भी माँग की थी कि सीरिया लेबनान से अपने सैनिक वापस बुलाए. सीरिया ने अब कहा है कि उसकी नीति लेबनान से जल्द से जल्द सैनिक वापस बुलाने की है. |
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