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क्यूबा में धूम्रपान पर रोक लगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिगारों के लिए मशहूर क्यूबा में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान के विरुद्ध कड़े प्रावधान आज से लागू हो रहे हैं. काम-काज की अधिकतर जगहों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध लग जाएगा. सिगरेट की मशीनें हटाई जा रही हैं और स्कूलों के पास तंबाकू से बने पदार्थ बेचना अब अवैध हो जाएगा. इस प्रस्ताव के लागू होने से कुछ ही घंटों पहले तक अधिकतर क्यूबा निवासी इस क़ानून या प्रावधान से पूरी तरह अनजान दिखे. काग़ज़ी कार्रवाइयों के आधार पर देखें तो धूम्रपान विरोधी ये प्रावधान शायद दुनिया के सबसे कड़े प्रावधान होंगे मगर सरकार ने इस क़ानून के प्रचार-प्रसार के लिए कोई असरदार क़दम नहीं उठाया है. राजधानी हवाना में रेस्तराँ और बार के मैनेजरों ने कहा कि वे वहाँ धूम्रपान रहित क्षेत्र बनाने को तो तैयार हैं मगर इस बारे में उनके पास कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि इस क़ानून को वे लागू कैसे करेंगे. क्यूबा का कहना है कि वो तंबाकू के प्रति लोगों के नज़रिए में बदलाव लाना चाहता है. मगर इस बारे में रोचक बात ये है कि इस तरह से ये देश लगभग पाँच सदियों से चली आ रही अपनी संस्कृति के ही विरुद्ध एक तरह का संघर्ष छेड़ रहा है. क्यूबा के आधे से अधिक वयस्क लोग धूम्रपान करते हैं. अधिकतर लोग तो किशोरावस्था में ही धूम्रपान शुरू कर देते हैं. तंबाकू और सिगार का निर्यात इस देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम रहा है क्योंकि इससे प्रति वर्ष लगभग 20 करोड़ डॉलर की कमाई उसे होती है. मगर इसका दूसरा पहलू भी है और वो ये कि हर साल क्यूबा में लगभग छह हज़ार लोग धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों की वजह से जान से हाथ धो बैठते हैं. इसे क्यूबा के लोगों की औसत आयु बढ़ाने की क्यूबा सरकार की एक कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है और माना जा रहा है कि इसकी प्रेरणा कहीं और से नहीं बल्कि ख़ुद राष्ट्रपति फ़िदेल कास्त्रो से मिली है. एक समय सिगार के प्रेमी कास्त्रो ने 1980 के दशक के मध्य में सिगार पीना छोड़ दिया था. |
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