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पूरे भारत में धूम्रपान पर प्रतिबंध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने पर प्रतिबंध लगाने वाला क़ानून लागू हो गया है. यह क़ानून भारत के नए धूम्रपान विरोधी अधिनियम के तहत लागू किया गया है, जिसे देश की संसद ने पिछले साल पारित कर दिया था. इस क़ानून के तहत तंबाकू से बनी चीज़ों के प्रत्यक्ष या परोक्ष विज्ञापनों और बच्चों को सिगरेट बेचने पर भी मनाही है. अधिकारियों ने कहा है कि इस क़ानून को तोड़ते हुए पाए गए किसी भी व्यक्ति पर 200 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. महाराष्ट्र राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है, “धूम्रपान पर यह प्रतिबंध मुख्य रूप से युवाओं के हित में है क्योंकि हमें भावी पीढ़ी की रक्षा करने की ज़रूरत है”. एपी समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1996 में किये गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ भारत में ग्यारह करोड़ बीस लाख लोग धूम्रपान करते हैं, जबकि नौ करोड़ साठ लाख लोग तंबाकू से बनी चीज़ें इस्तेमाल करते हैं. दिशानिर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता के अनुसार इस संबंध में दिशानिर्देश फ़रवरी में जारी कर दिए गए थे और राज्य सरकारों को इस प्रतिबंध का प्रचार-प्रसार करने और क़ानून को लागू करने के लिए, तीन महीने का समय दिया गया था. इन दिशानिर्देशों में कहा गया है कि रेस्तराओं, होटलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के मालिकों को धूम्रपान की मनाही वाले इलाक़ो के बारे में संकेत-चिन्ह प्रदर्शित करने होंगे. इन जगहों पर धूम्रपान करते हुए पाए गए किसी भी व्यक्ति पर जुर्माना किया जाएगा. मगर धूम्रपान त्याग चुके लोगों का कहना है कि इस क़ानून के बावजूद प्रदूषण कम नहीं होगा. उनका कहना है, “सड़कों पर वाहनों के धुँए के कारण, इससे कहीं ज़्यादा प्रदूषण फैला हुआ है”. |
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