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इराक़ में अपहृत आर्चबिशप रिहा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोमवार को मूसल से अपहृत सीरियाई कैथोलिक आर्चबिशप बसीले जॉर्जिस कैसमुसा रिहा हो गए हैं. वैटिकन ने इराक़ में वरिष्ठ पादरी बसीले जॉर्जिस कैसमुसा के अपहरण की आलोचना की थी. वैटिकन के एक प्रवक्ता ने इसे 'आतंकवादी कार्रवाई' बताया था और आर्चबिशप की तुरंत रिहाई की मांग की थी. मूसल के 66 वर्षीय सीरियाई कैथोलिक आर्चबिशप कैसमुसा का सोमवार को गिरजाघर के बाहर से अपहरण कर लिया गया था. आर्चबिशप का अपहरण ऐसे समय हुआ जब इराक़ में चुनाव क़रीब हैं और वहाँ हिंसक घटनाओं में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हो रही है. सोमवार को इराक़ के अलग-अलग हिस्सों में हुई घटनाओं में कम से कम 20 लोग मारे गए. इनमें ज़्यादातर इराक़ी सुरक्षाकर्मी थे. आर्चबिशप कैसामुसा छह साल पहले मूसल के सीरियाई कैथोलिक समुदाय के नेता नियुक्त किए गए थे. सोमवार को स्थानीय समय के मुताबिक़ शाम पाँच बजे उनका अपहरण कर लिया गया था. घटनाक्रम एक स्थानीय पादरी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि आर्चबिशप को उस समय अगवा किया गया जब वे गिरजाघर के बाहर अपने कार में बैठने की कोशिश कर रहे थे.
उन्होंने बताया कि अपहर्ताओं ने उन्हें ज़बरदस्ती अपनी गाड़ी में बैठा लिया और फिर फ़रार हो गए. पिछले कुछ महीनों से इराक़ में ईसाई समुदाय पर हमले बढ़ गए हैं. दिसंबर में मूसल में ही दो गिरजाघरों पर बम से हमले किए गए थे. दो करोड़ 50 लाख की आबादी वाले इराक़ में ईसाई तीन प्रतिशत हैं. सीरियाई कैथोलिक चर्च कैथोलिक परंपरा की पूर्वी धारा से जुड़ा हुआ है. यह मध्य पूर्व के कई स्वायत्त कैथोलिक गिरजाघरों में से एक है. ये चर्च रोम के पोप के प्रति अपनी निष्ठा को प्रदर्शित करते हैं लेकिन धार्मिक स्तर पर इन्हें कुछ स्वतंत्रता भी हासिल है. मूसल में हाल के दिनों में सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है लेकिन इसके बावजूद आर्चबिशप कैसामुसा का अपहरण हो गया. यहाँ अमरीकी और इराक़ी सैनिक उन विद्रोहियों से निपटने की कोशिश कर रहे हैं जो चुनाव नहीं चाहते. |
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