|
मानवाधिकारों की अनदेखी की अमरीका ने | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जानी मानी मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने अबू ग़रैब जेल और ग्वांतानामो बे के कैदियों के साथ दुर्व्यवहार के मामले में अमरीका की कड़ी आलोचना की है. ह्यूमन राइट्स वॉच की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि जब अमरीका जैसा शक्तिशाली देश कानूनों का खुला उल्लंघन करता है तो फिर अन्य देश भी ऐसा ही कर सकते हैं. संगठन का कहना है कि अबू ग़रैब और ग्वांतानामो बे के मामलों की जांच स्वतंत्र अमरीकी आयोग से कराई जानी चाहिए. न्यूयार्क की इस संस्था का कहना है कि अमरीकी सेनाओं द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के कारण दुनिया भर में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं पर अंकुश लगाने में दिक्कतें बढ़ जाएंगी. संस्था के कार्यकारी निदेशक केनेथ रॉथ कहते हैं " अमरीकी सरकार अपने देश से बाहर न्याय का कोई ख्याल नहीं करती. हालांकि अमरीकी सरकार ने इराक़ और ग्वांतानामो बे की घटनाओं की निंदा की है और जांच के आदेश भी दिए हैं. नैतिक पतन संस्था ने बुश प्रशासन पर युद्घबंदियों के साथ होने वाले व्यवहार की ज़िम्मेदारी नहीं लेने का आरोप लगाया है. उनका कहना है " अमरीका ने सारी ज़िम्मेदारी अफगानिस्तान और इराक़ में लड़ रहे युवा सैनिकों पर डाल दी है. " रॉथ का कहना है " इतना शक्तिशाली देश अमरीका ही अगर ऐसा कर रहा है तो फिर वो देश क्या करेंगे जिन पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया जाता रहा है. "
संस्था के अनुसार ग्वांतानामो बे और अबू ग़रैब की घटनाओं पर अमरीका का रुख दर्शाता है कि मानवाधिकार मामलों में उसका नैतिक पतन हुआ है. संस्था ने इन दोनों मामलों की स्वतंत्र आयोग से जांच कराने की मांग की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर कहते हैं कि इन मामलों में आठ जांच कार्य चल रहे हैं और जूनियर सैनिकों को सजाएं भी दी गई हैं. अपराध अदालतें ह्यूमन राइट्स वॉच ने पूरी दुनिया पर दारफुर संकट के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया है. इस संकट में 70 हज़ार लोग मारे गए और 20 लाख से अधिक बेघर हो गए. रॉथ ने कहा कि दुनिया बार बार वादा करती है कि फिर कभी कभी ऐसा नहीं होगा लेकिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं. संस्था ने चीन और रुस का नाम लेकर कहा है कि ये दोनों देश सूडान में तेल अनुबंधों और हथियारों की बिक्री संबंधी अनुबंध बचाने को लेकर अधिक चिंतित थे. संस्था की 527 पृष्ठों की वार्षिक रिपोर्ट में पिछले साल 60 देशों में मानवाधिकार मामलों के बारे में लिखा गया है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||