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इराक़ में पादरी का अपहरण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैटिकन का कहना है कि इराक़ के उत्तरी शहर मोसुल में विद्रोहियों ने एक कैथलिक पादरी का अपहरण कर लिया है. 66 वर्ष के पादरी, बसीले जॉर्जिस कासमुसा को शहर के गिरजाघर के बाहर से अगवा किया गया. वैटिकन ने एक वक्तव्य में कहा कि वह इस तरह के आतंकवादी कृत्य की तीव्र आलोचना करते हुए पादरी को तुरंत छोड़े जाने की माँग करते हैं. इससे पहले भी इराक़ में ईसाईयों पर हमले होते रहे हैं. दिसम्बर में ही मोसुल में दो गिरजाघरों में बम धमाके हुए थे. बढ़ती हिंसा ख़ास बात ये है कि अपहरण की ये वारदात ऐसे दिन हुई है जब इराक़ में दिनभर काफ़ी खून-ख़राबा हुआ है. साथ ही 30 जनवरी को इराक़ में आम चुनाव भी होने वाले हैं. सोमवार को ही उत्तरी इराक़ी सुन्नी बहुल शहर बैजी में एक पुलिस स्टेशन के बाहर हुए कार बम धमाके में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और 15 घायल हुए. इनमें ज़्यादातर पुलिसवाले थे. इससे पहले राजधानी बग़दाद के उत्तर बक़ूबा शहर के निकट बंदूकधारियों ने आठ इराक़ी सैनिकों की गोली मार कर हत्या कर दी. बग़दाद से बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर का कहना है कि 30 जनवरी को होने वाले चुनाव में सुरक्षा व्यवस्था की ज़िम्मेदारी इराक़ी सुरक्षाकर्मियों पर है इस कारण विद्रोही उन्हें निशाना बना रहे हैं. विद्रोहियों ने इराक़ी नेशनल गार्ड की एक सुरक्षा चौकी पर अंधाधुँध गोलीबारी की. इराक़ में 30 जनवरी को चुनाव होने हैं. लेकिन हिंसा की घटनाओं में तेज़ी आती जा रही है. यह इलाक़ा सुन्नी बहुल है और सुन्नी नेता इराक़ी चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं. हाल के दिनों में इस इलाक़े में सरकारी ठिकानों पर कई हमले हुए हैं. विद्रोहियों ने उन स्कूलों और अन्य सरकारी इमारतों पर भी हमले किए हैं जहाँ मतदान केंद्र बनाए गए हैं. हाल ही में बसरा में दो मतदान केंद्रों पर बम से हमले किए गए जिससे वे पूरी तरह नष्ट हो गए. |
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