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युगांडा में कॉन्डोम की कमी से चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़्रीका के देश युगांडा में कॉन्डोम की कमी हो गई है. देश की 'कॉन्डोम संयोजक' वस्था किब्रिज ने इसकी पुष्टि की है. उनका कहना था, "अगले छह महीने के लिए हमें कॉन्डोम की सीमित सप्लाई से ही गुज़ारा करना होगा. इस दौरान कई लोग असुरक्षित यौन संबंध के शिकार भी हो सकते हैं." युगांडा में एचआईवी और एड्स की समस्या को देखते हुए इस बारे में चिंता व्याप्त है. वर्ष 2002 के अंत तक देश की लगभग छह प्रतिशत जनसंख्या एचआईवी या एड्स से ग्रस्त थी. किब्रिज का कहना था, "हम नहीं चाहते कि किसी की मृत्यु हो जाए. यदि एचआईवी फैलने से रोकना संभव है तो हम ऐसा करना चाहते हैं क्योंकि ऐसा न करना अपराध के समान होगा." कॉन्डोम्स की कमी इसलिए हुई है क्योंकि लगभग एक करोड़ कॉन्डोम गोदामों में बंद पड़े हैं और उन पर टेस्ट किए जाने हैं. युगांडा में इन कॉन्डोम की गुणवत्ता के बारे में शंका जताई गई थी इसलिए इनका निरीक्षण होगा और ये प्रक्रिया काफ़ी लंबी है. कॉन्डोम के सरकारी ब्रैंड - एंगाबु की सप्लाई बंद कर दी गई है और स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दिया जाने वाले मुफ़्त कॉन्डोम ख़त्म हो रहे हैं. सरकार के पास पचास लाख अन्य ब्रैंड के कॉन्डोम हैं जो दो महीने के लिए पर्याप्त हैं और अगली खेप छह महीने के बाद आनी है. सरकार के एक विभाग ने कॉन्डोम पर टेस्ट करने के लिए उन्हें यूरोप भेजा है क्योंकि युगांडा में कॉन्डोम की जाँच करने की व्यवस्था नहीं है. |
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