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यूक्रेन संकट: वार्ता फिर नाकाम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूक्रेन में राजनीतिक संकट को सुलझाने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच हुई वार्ता नाकाम रही है. निवर्तमान राष्ट्रपति लियोनिद कुचमा ने कहा है कि दोनों पक्षों के बीच सोमवार देर रात तक बातचीत चली मगर कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी. इस बातचीत में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ भी शामिल थे और पहले ये उम्मीद जताई जा रही थी कि कोई ना कोई हल निकल जाएगा. हालाँकि राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों पक्षों में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति भी हुई है. इनमें फ़र्ज़ी वोटिंग रोकने के लिए चुनाव सुधार और देश के चुनाव आयोग को भंग करने जैसे मुद्दे शामिल हैं. मगर राष्ट्रपति के अधिकारों में कटौती और यूक्रेन सरकार को बर्ख़ास्त करने के लिए संविधान में बदलाव करने के प्रश्न पर मतभेद बने रहे. दोबारा चुनाव 26 दिसंबर को यूक्रेन में दोबारा राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. यूक्रेन में चुनाव अधिकारियों ने पिछले महीने हुए चुनाव में प्रधानमंत्री विक्टर यानूकोविच को विजेता घोषित किया था. मगर विपक्षी उम्मीदवार विक्टर युश्चेंको और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए जिसके बाद मामला अदालत तक जा पहुँचा. पिछले शुक्रवार को यूक्रेन के सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष के आरोप को सही ठहराते हुए दूसरे दौर के चुनाव दोबारा करवाने के आदेश दिए. |
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