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यूक्रेन की सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट के 21 न्यायाधीशों ने 7 घंटो के सोच-विचार के बाद अपना फ़ैसला सुनाया कि पहले दौर के मतदान के बाद जिस उम्मीदवार को सबसे ज़्यादा मत मिले हैं उसे ही राष्ट्रपति चुना जाना चाहिए और वो हैं विपक्षी नेता विक्टर युस्चेनको. बीबीसी संववादाता कहते है कि यूक्रेन में सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले को विपक्षी नेता विक्टर युस्चेनको की जीत की तरह देखा जाए क्योंकि उन्होंने हमेशा दूसरे दौर का मतदान दोबारा कराने की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला जैसे ही कोर्ट के बाहर खड़े युस्चेनको के हज़ारों समर्थकों ने सुना बस उनके समर्थन में नारे लगने शुरू हो गए. बीबीसी के यूक्रेन संववादाता का कहना है कि ये प्रधानमंत्री विक्टोर यानुकोविच और निवर्तमान राष्ट्रपति लियोनिद कुचमा के लिए भारी धक्का है क्योंकि वे मांग करते रहे हैं कि चुनाव नए सिरे से कराए जाने चाहिए
युस्चेनको की मांग का पड़ोसी देश पोलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेडर क्वासनेवस्की भी समर्थन करते हैं. हालांकि रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने इस मांग को थोड़े संदेह के साथ देखा है. उन्होंने पूर्व में चुनाव नए सिरे से कराने पर ज़ोर दिया है. सुप्रीम कॉर्ट के फ़ैसले से पहले दोनों उम्मीदवारों ने कहा था कि वो कॉर्ट के फ़ैसले का पालन करेंगे और एक तरह से उनके बयान की कड़ी परीक्षा होगी कि वो इसपर क़ायम रखते है या नहीं. |
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