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पाकिस्तान में स्थिति को संभाला: मुशर्रफ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने लंदन में ब्रिटेन के सांसदों से मुलाकात की है और दावा किया है कि पाकिस्तानी लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था के मुश्किल दौर में उन्होंने स्थिति को संभाला. इस कार्यक्रम में शामिल लॉर्ड नज़ीर अहमद ने बीबीसी को बताया कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कई ब्रितानी सांसदों को संबोधित किया. उनके अनुसार राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने सांसदों को बताया कि जब उन्होंने सत्ता संभाली तो देश में लोकतंत्र शिथिल पड़ा हुआ था और देश दिवालिया होने की कगार पर था. लॉर्ड नज़ीर ने बताया कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई, फ़लस्तीन और कश्मीर के साथ-साथ इस विषय पर भी चर्चा की कि उन्होंने 'पाकिस्तान में लोकतंत्र बहाल किया.' राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के संबोधन का विश्लेषण करते हुए लॉर्ड नज़ीर ने कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने पश्चिमी देशों को ये बताने की कोशिश की कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में वे ही पश्चिमी देशों के सबसे बेहतर सहयोगी हैं और उनका कोई विकल्प नहीं है. साथ ही पाकिस्तानियों और पाकिस्तानी मूल के ब्रितानियों के लिए उनका संदेश था कि यदि पश्चिमी देशों से पाकिस्तान के लिए कोई मदद और सहयोग ला सकता है तो वे राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ही हैं. लार्ड नज़ीर का कहना था कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के संबोधन से ऐसा प्रतीत हुआ कि क्योंकि पाकिस्तान में उन्हें 2007 तक राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष के पद संभालने की औपचारिक अनुमति मिल गई है इसलिए पश्चिमी देशों को भी उनके सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने की माँग छोड़ देनी चाहिए. |
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