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सोमवार, 06 दिसंबर, 2004 को 16:27 GMT तक के समाचार
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अमरीकी नीति पर मुशर्रफ़ के सवाल
ब्लेयर और मुशर्रफ़
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से उनके निवास पर मुलाक़ात की
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने कहा है कि जिस तरह अमरीका 'आतंकवाद के ख़िलाफ़' जंग चला रहा है उससे विश्व में होने वाले संघर्षों के मूल कारणों का निवारण नहीं हो रहा है.

बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने सवाल उठाया, "आतंकवाद का जन्म क्यों होता है? ऐसी क्या परिस्थितियाँ है जो युवकों को अपनी जान तक दाँव पर लगा देने को मजबूर करती हैं?"

उनका कहना था, "युवकों को जान दाँव पर लगाने को मजबूर करते हैं राजनीतिक विवाद जिन्हें सुलझाने की जरूरत है. साथ ही अशिक्षा और ग़रीबी के मुद्दे भी है जो मिलकर कट्टरपंथ और चरमपंथ को जन्म देते हैं."

दो दिन के ब्रिटेन दौरे पर लंदन पहुँचे राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के साथ मुलाकात के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया.

उनका कहना था कि पाकिस्तान 'अपनी ज़मीन पर आतंकवाद और चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई' जीत रहा है.

 युवकों को जान दाँव पर लगाने को मजबूर करते हैं राजनीतिक विवाद जिन्हें सुलझाने की जरूरत है. साथ ही अनपढ़ता और ग़रीबी के मुद्दे भी है जो मिलकर कट्टरपंथ और चरमपंथ को जन्म देते हैं
राष्ट्रपति मुशर्रफ़

उनका कहना था कि पाकिस्तान आतंकवाद का मुँहतोड़ जवाब दे रहा है और ऐसा करता रहेगा.

उधर प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने उन बातों को ख़ारिज किया है जिनमें कहा गया है इराक़ में अमरीका की नीतियाँ असफल रही हैं.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रही रणनीति को जारी रखना चाहिए.

उन्होंने कहा कि स्पेन में हुए ताज़ा बम हमलों से इस रणनीति को जारी रखने की ज़रूरत को बल मिलता है.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ मंगलवार को ब्रितानी संसद के निचले सदम 'हाउस ऑफ़ कॉमन्स' को भी संबोधित करेंगे.

जब पाकिस्तान में सैनिक शासन लागू हुआ था तो राष्ट्रमंडल से पाकिस्तान को निलंबित कर दिया गया था. बाद में पाकिस्तान की सदस्यता बहाल कर दी गई.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के 'हाउस ऑफ़ कॉमन्स' को संबोधित करने के बारे में बीबीसी हिंदी ने ब्रिटेन के लॉर्ड भीखू पारेख से बात की.

लॉर्ड पारेख का कहना था, "हर सरकार को विदेशी सरकारों से नाता बनाना पड़ता है. जब सैनिक शासन लागू हुआ था तो सदस्यता निलंबित की थी."

उनका कहना था, "पाकिस्तान में लोकतंत्र स्थापित करने में 10-15 साल लग सकते हैं. तब तक ब्रितानी सरकार राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को साथ रखकर, असल में लोकतंत्र कायम करने के लिए दबाव बनाए रखना चाहती है."

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