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कॉलिन पॉवेल येरूशलम पहुँचे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल मध्य पूर्व की अपनी यात्रा पर इसराइल पहुँच गए हैं, जहाँ वे इसराइली और फ़लस्तीनी दोनों पक्षों के नेताओं से मुलाक़ात करेंगे. अमरीकी चुनाव, यासिर अराफ़ात की मृत्यु और कॉलिन पॉवेल का विदेश मंत्री पद से हटने की घोषणा, इन तीन महत्वपूर्ण घटनाओं के बाद पहली बार मध्य पूर्व के मामले में कोई बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहल हो रही है. मध्य पूर्व का मंज़र बहुत बदला-बदला है. कोई नहीं बता सकता कि यासिर अराफ़ात की मौत के बाद अब, दशकों से हिंसा की आग में झुलस रही मध्य पूर्व की राजनीति किस राह जाएगी. लेकिन इतना ज़रूर है कि फ़लस्तीनी नेतृत्व में परिवर्तन को मध्य पूर्व समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है. यही वजह है कि इस सप्ताह मध्य पूर्व के मामले पर कई कूटनीतिक बैठकें होंगी, कई वार्ताएँ होने की संभावना है लेकिन परिणाम की भविष्यवाणी कोई नहीं कर रहा. सोमवार को कॉलिन पॉवेल फ़लस्तीनी और इसराइली नेताओं से मिलेंगे, वे इन नेताओं से मुख्य रूप से फ़लस्तीनी चुनाव के बारे में बात करेंगे जो कि नौ जनवरी को होने वाली है. पॉवेल दोनों पक्षों को यह समझाने की कोशिश करेंगे की फ़लस्तीनी प्रशासन के चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष होने चाहिए तभी भविष्य के लिए कुछ उम्मीद बाक़ी रहेगी. पॉवेल अठारह महीनों के अंतराल के बाद मध्य पूर्व की यात्रा पर पहुँचे हैं, उनकी इस यात्रा की तैयारी में जुटे अमरीकी उप विदेश मंत्री विलियम बर्न्स कहते हैं, "हम फ़लस्तीनी चुनाव के प्रति अमरीकी समर्थन का इज़हार कर रहे हैं. हम इस चुनाव को सफल बनाने के लिए हरसंभव सहायता करने के लिए तैयार हैं." फ़लस्तीनी अधिकारियों को उम्मीद है कि पॉवेल की इस यात्रा से अमरीका और फ़लस्तीनी पक्ष के बीच सीधी वार्ता एक बार फिर शुरू हो सकेगी. इस सप्ताह मध्य पूर्व के मामले पर बातचीत जारी रहेगी क्योंकि ब्रितानी विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ भी वहाँ पहुँचने वाले हैं. |
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