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अराफ़ात की मौत के कारण की जाँच | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी अधिकारियों का एक दल यासिर अराफ़ात की मौत के कारण जानने के लिए फ्रांस जाएगा. फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात की ग्यारह नवंबर को पेरिस में मौत हो गए थी. लेकिन उनकी बिमारी को सार्वजनिक नहीं किया गया है. प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने अराफ़ात के स्वास्थ से जुड़े दस्तावेज़ों की मांग की है. लेकिन फ्रांस के क़ानून के अनुसार अराफ़ात की मौत जिस बिमारी से हुई उसके बारे में जानकारी सिर्फ़ उनके परिवार को दी जा सकती है, यानि उनकी पत्नी सुहा अराफ़ात को ही ये दस्तावेज़ उपबल्ध हो सकते हैं. अरब जगत में इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या 75 वर्षिए अराफ़ात की मौत ज़हर दिए जाने से हुई? सफ़ाई फ़लस्तीनी अधिकारियों का कहना था, "हमारे शहीद नेता यासिर अराफ़ात की मौत कैसे हुई उसकी रिपोर्ट पर सफ़ाई लेने के लिए एक दल फ्रांस जाएगा." इस बीच फ्रांस के ‘ल मोंद’ अख़बार ने कहा है कि अराफ़ात का इलाज करने वाले डॉक्टरों का मानना है कि अराफ़ात की मौत डीआईसी यानि डिसैमिनेटिड इंट्रावैसक्यूलर कोएग्यूलेशन नाम की बिमारी से हुई थी जिसमें ख़ून के थक्के नहीं बन पाते हैं. अख़बार का कहना है कि बहुत अच्छे सुत्रों से पता चला है कि डीआईसी बिमारी अराफ़ात की उम्र वाले व्यक्तियों में किसी संक्रमण या फिर कैंसर से होती है. हालांकि, अराफ़ात के शरीर से ऐसे संकेत नहीं मिले थे. अख़बार में एक डॉक्टर के हवाले से ये भी लिखा गया है कि उन्होंने आधुनिक तकनीक के ज़रीए इस बात की जाँच की कि अराफ़ात को ज़हर तो नहीं दिया गया मगर जाँच के बाद ये पता लगा कि ऐसा नहीं हुआ था. |
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