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रविवार, 14 नवंबर, 2004 को 16:38 GMT तक के समाचार
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फ़लस्तीनी राष्ट्रपति चुनाव नौ जनवरी को
अहमद क़ुरई
प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई भी एक प्रमुख उम्मीदवार हो सकते हैं
फ़लस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अगले साल नौ जनवरी को होंगे.

अंतरिम राष्ट्रपति राव्ही फ़त्तुह ने रविवार को ये घोषणा की.

ग़ौरतलब है कि यासिर अराफ़ात की मौत के बाद ये चुनाव हो रहे हैं. यासिर अराफ़ात फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति होने के साथ-साथ फ़लस्तीन मुक्ति संगठन यानी पीएलओ भी अध्यक्ष थे.

कई दिन की बीमारी के बाद 11 नवंबर 2004 को पेरिस के एक सैन्य अस्पताल में निधन हो गया था.

फ़लस्तीनी प्रशासन का कामकाज इस समय फ़लस्तीनी नेताओं का एक संयुक्त नेतृत्व चला रहा है.

महमूद अब्बास उम्मीदवार

फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) और उसके सशस्त्र संगठन फ़तह ने चुनाव के लिए पूर्व प्रधानमंत्री महमूद अब्बास उर्फ़ अबू माज़ेन को अपना उम्मीदवार चुना है.

महमूद अब्बास
पीएलओ और फ़तह ने महमूद अब्बास को अपना उम्मीदवार चुना है

अन्य उम्मीदवारों में फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई और फ़ारुक़ क़दूमी हो सकते हैं जिन्हें हाल में फतेह का अध्यक्ष बनाया गया था.

यरूशलम पर विवाद

उधर इस चुनाव पर इसराइली मंत्रिमंडल में मतभेद हो गए हैं.

फ़लस्तीनी लोग माँग कर रहे हैं कि इसराइल उन्हें गज़ा पट्टी, पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में बिना किसी रोक-टोक के चनाव प्रचार की अनुमति दे.

उन्होंने अमरीका और यूरोपीय संघ से अनुरोध किया है कि इस बारे में वे संभावित इसराइली रोक-टोक को बंद कराएँ.

उधर इसराइली विदेश मंत्री सिलवम शेलॉम ने कहा है कि पूर्वी यरूशलम के निवासियों को मतदान नहीं करना चाहिए क्योंकि उससे शहर के भविष्य पर असर पड़ सकता है.

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अराफ़ात के निधन के बाद नया राष्ट्रपति चुना जाना है

लेकिन इसराइली अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन विदेश मंत्री सिलवम शेलॉम के मत से सहमत नहीं हैं और कहते हैं कि वहाँ के निवासियों ने 1996 के चुनावों में भी भाग लिया था.

प्रधानमंत्री क़ुरई का कहना है कि येरुशलम के दो लाख 28 हज़ार निवासियों को मतदान में भाग लेने का वही अधिकार है जो अन्य फ़लस्तीनियों को है.

अंतरिम राष्ट्रपति फ़त्तुह का कहना है कि उम्मीदवारों को आगे आने के लिए 20 नवंबर से 12 दिन का समय दिया जाएगा और चुनाव प्रचार 27 दिसंबर से शुरु होगा जो मतदान से एक दिन पहले तक चलेगा.

फ़लस्तीनी क़ानून के तहत राष्ट्रपति के निधन की परिस्थिति में चुनाव 60 दिन के भीतर होने चाहिए.

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