| अराफ़ात को रामल्ला में दफ़नाया गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात को पश्चिमी तट के शहर रामल्ला में मार्बल और पत्थर से बनी एक क़ब्र में दफ़ना दिया गया है. रामल्ला में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस मौक़े पर बिल्कुल अफ़रा-तफ़री मच गई क्योंकि अराफ़ात को अंतिम श्रद्धाँजलि देने के लिए हज़ारों की संख्या में उनके फ़लस्तीनी समर्थक रामल्ला पहुँच गए थे. अराफ़ात का शव काहिरा से लेकर आने वाले हेलीकॉप्टर जैसे ही ज़मीन पर उतरा तो उनके शोक संतप्त समर्थकों ने हवाई फ़ायर किए. हेलीकॉप्टर के चारों तरफ़ लोगों का हजूम उमड़ पड़ा जिसकी वजह से जनाज़ा ले जाने में कुछ देरी हुई और भारी भीड़ के बीच जनाज़े को क़ब्र तक पहुँचाया गया. ग़ौरतलब है कि 75 वर्षीय अराफ़ात की गुरूवार 11 नवंबर 2004 को पेरिस के एक अस्पताल में मौत हो गई थी. जिसके बाद गुरूवार को ही उनका शव मिस्र की राजधानी काहिरा ले जाया गया जहाँ राजकीय सम्मान के साथ शोक सभा हुई और शुक्रवार को उनका शव दफ़नाए जाने के लिए पश्चिमी तट के रामल्ला में उनके परिसर ले जाया गया. अराफ़ात को रामल्ला में उनके मुख्यालय के परिसर में ही दफ़नाया गया है. अरफ़ात के समर्थक रामल्ला में उनके टूटे-फूटे मुख्यालय के भीतर जाने की हरसंभव कोशिश कर रहे थे जहाँ उनको सूर्यास्त से पहले दफ़नाया जाना था. इस अवसर पर दुनिया के विभिन्न देशों के राजनेताओं ने काहिरा पहुँचकर अराफ़ात को श्रद्धाँजलि दी जिनमें भारतीय राजनेता भी शामिल थे. रामल्ला राजकीय सम्मान के बाद अराफ़ात के शव को रामल्ला ले जाया गया जहाँ पिछले तीन साल से अराफ़ात नज़रबंद थे.
अराफ़ात की क़ब्र में यरूशलम की अल अक़्सा मस्जिद की मिट्टी भी मिलाई गई. उनका शव एक ऐसे ताबूत में रखकर दफ़नाया गया जिसे ज़रूरत पड़ने पर सुरक्षित निकाल जा सके. फ़लस्तीनियों का कहना है कि उनको उम्मीद है कि कभी भविष्य में उनके ताबूत को यरूशलम ले जाने की इजाज़त मिली तो वे अराफ़ात का शव निकालकर उन्हें यरूशलम में दफ़न कर सकेंगे. अराफ़ात की इच्छा थी कि उन्हें यरूशलम में ही दफ़नाया जाए मगर इसराइल ने इसकी अनुमति नहीं दी. राजकीय सम्मान अराफ़ात के जनाज़े की नमाज़ शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ काहिरा में एक मस्जिद में पढ़ी गई. इस अवसर पर अरब देशों के अलावा दुनिया भर के राजनेता अराफ़ात को श्रद्धाँजलि देने के लिए जुटे जिनमें भारत के भी कई मंत्री शामिल थे. भारत से जो राजनेता आए उनमें विदेश मंत्री नटवर सिंह, रेल मंत्री लालू यादव, संसदीय कार्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद और विदेश राज्य मंत्री ई अहमद शामिल थे. मिस्र के अधिकारियों ने पहले ही कह दिया था कि अराफ़ात के अंतिम संस्कार में आम लोग नहीं आ सकते और सुरक्षा कारणों से आस-पास के रास्ते बंद कर दिए गए थे. श्रद्धांजलि यासिर अराफ़ात को श्रद्धांजलि देने के लिए तमाम देशों के राजनेता काहिरा में जुटे जिनमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी थे.
अल्जीरिया, बांग्लादेश, मिस्र, इंडोनेशिया, लेबनान, दक्षिण अफ़्रीका, सूडान, ट्यूनीशिया, यमन और ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति काहिरा पहुँचे, वहीं पाकिस्तान, श्रीलंका, मलेशिया और स्वीडन के प्रधानमंत्री काहिरा शामिल हुए. अमरीका की ओर से सहायक विदेश मंत्री विलियम बर्न्स पहुँचे जबकि ब्रिटेन की ओर से विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ श्रद्धांजलि देने पहुँचे. जोर्डन के शाह अब्दुल्ला और सऊदी अरब के युवराज अब्दुल्ला भी अराफ़ात को श्रद्धाँजलि देने काहिरा गए. |
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