|
अराफ़ात की घटनाओं के वीडियो | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीन के प्रतीक और उद्धारक मोहम्मद अब्दुल रहमान अब्दुल रऊफ़ अराफ़ात अल-क़ुदवा अल-हुसैनी उर्फ़ यासिर अराफ़ात का 11 नवंबर 2004 को पेरिस के एक अस्पताल में निधन हो गया. वह 75 वर्ष के थे और कुछ दिन से बीमार थे. क़रीब चार दशक तक उन्होंने फ़लस्तीनी आंदोलन का नेतृत्व किया. यासिर अराफ़ात वर्षों तक लड़े. वह फ़लस्तीनी लड़ाई का चेहरा और प्रतीक बन गए थे. पूरा फ़लस्तीन वापस लेने के उनके लक्ष्य ने ही वो रास्ता बनाया जिसके ज़रिए उसका कुछ हिस्सा मिलने के लिए बातचीत हो सकी. उनके मौत के दिन वह घटना याद आती है जब उन्होंने 1974 में संयुक्तराष्ट्र महासभा को पहली बार संबोधित किया था. अंतरराष्ट्रीय जगत को संबोधित करते हुए अराफ़ात ने कहा था, "वह शांति के प्रतीक ज़ैतून की डाल और आज़ादी के दीवाने की बंदूक के साथ आए हैं. मेरे हाथों से ज़ैतून की डाल गिरने नहीं देना." |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||