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अफ़गान चुनाव प्रचार आख़िरी दौर में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में शनिवार को होनेवाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले उम्मीदवार मतदाताओं को अपने समर्थन में लाने की आख़िरी कोशिश कर रहे हैं. तीन साल पहले अफ़ग़ानिस्तान से तालिबान के शासन के पतन के बाद ये पहला राष्ट्रपति चुनाव है. मंगलवार को देश के अंतरिम राष्ट्रपति और जीत के सबसे बड़े दावेदार हामिद करज़ई पहली बार राजधानी काबुल से दूर एक चुनाव सभा की है. उधर अफ़ग़ान अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षाबलों ने देश के दक्षिण में एक इलाक़े पर धावा बोला है जहाँ उनकी तालेबान के लड़ाकों से झड़प हुई है. उनका कहना है कि इस संघर्ष में सात विद्रोही मारे गए जबकि पाँच को पकड़ लिया गया. अधिकारियों का मानना है कि विद्रोही चुनाव से पहले किसी तरह के हमले की योजना बना रहे थे. चुनाव सभाएँ
हामिद करज़ई ने काबुल से बाहर अपनी चुनाव सभा राजधानी से दक्षिण में लगभग 100 किलोमीटर दूर ग़ज़नी शहर में की. अफ़ग़ानिस्तान की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए ग़ज़नी शहर में ज़बरदस्त सुरक्षा की गई थी. करज़ई के एक प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और पूर्व शिक्षा मंत्री युनूस क़ानूनी पहले ही ग़ज़नी के एक फ़ुटबॉल स्टेडियम में सभा कर चुके हैं. उनके समर्थकों में बड़ी संख्या में महिलाएँ भी थीं और उन्होंने क़ानूनी की तस्वीरों वाली तख़्तियाँ लेकर उनका समर्थन किया. दोस्तम का इलाक़ा उधर अफ़ग़ानिस्तान के उत्तर स्थित शहर मज़ारे शरीफ़ में करज़ई के एक अन्य प्रतिद्वंद्वी जनरल अब्दुल रशीद दोस्तम के समर्थन में हज़ारों अफ़ग़ान सड़कों पर निकले. भारी कद-काठी और भारी आवाज़ वाले दोस्तम की उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में अच्छी पैठ मानी जाती है. वे यहाँ 1980 के दशक में सोवियत सेना के अफ़ग़ानिस्तान में दखल के बाद से ही सत्ता के क़रीब पहुँचे और उन्होंने अपनी एक सेना भी बना ली. शनिवार को होनेवाला चुनाव उनके लिए एक चुनौती है क्योंकि उत्तर अफ़ग़ानिस्तान में पीछे पड़ने से उनके प्रभाव पर सवालिया निशान लग सकता है. |
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