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शनिवार, 18 सितंबर, 2004 को 18:39 GMT तक के समाचार
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अफ़ग़ानिस्तान: अकेली महिला उम्मीदवार
मसूदा जलाल
मसूदा जलाल ने हामिद करज़ई को चुनौती दी है
जब डॉक्टर मसूदा जलाल ने अपने परिवार के सदस्यों को बताया कि वो अफ़ग़ानिस्तान के पहले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने जा रही हैं तो उन्होंने नाराज़गी व्यक्त की और उनका मज़ाक भी उड़ाया.

मसूदा जलाल देश की हिंसा और कई धड़ों में विभाजित राजनीति में अभी प्रवेश ही कर रही हैं, उनकी प्रतिक्रिया पर हैरत नहीं होनी चाहिए.

बच्चों की बीमारी की विशेषज्ञ डॉक्टर मसूदा जलाल राष्ट्रपति चुनावों में एकमात्र महिला उम्मीदवार हैं. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति चुनावों में 18 उम्मीदवार मैदान में हैं.

डॉक्टर मसूदा जलाल के पिता कपड़ा उद्योग में कर्मचारी हैं और उनकी माँ लेखिका हैं. उनके पति काबुल यूनिवर्सिटी में क़ानून पढ़ाते हैं.

ग़रीबी उन्मूलन

डॉक्टर मसूदा जलाल के भाई-बहन सभी उच्च शिक्षा प्राप्त हैं, जिनमें से दो डॉक्टरी पढ़ रहे हैं, एक कंप्यूटर साइंस इंजिनियरिंग पढ़ रहा है और चौथा पत्रकार है.

डॉक्टर मसूदा जलाल का कहना है कि उनका परिवार उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित है.

मसूदा जलाल
मसूदा जलाल जमकर चुनाव प्रचार कर रही हैं

चुनाव से पूर्व जारी हिंसा इस चिंता का मुख्य कारण है क्योंकि तालेबान जैसे गुट चुनावों में रुकावटें डालने की कोशिश में लगे हैं. राष्ट्रपति चुनावों में उम्मीदवारों को ये गुट निशाना बना सकते हैं.

डॉक्टर मसूदा जलाल कहती हैं कि जहाँ उनके पति उन पर हमलों की आशंका से चिंतित हैं, वहीं उनके माँ-बाप उनसे कह रहे हैं कि अगर वो चुनाव में हार गईं तो परिवार की प्रतिष्ठा को धक्का लगेगा.

लेकिन डॉक्टर मसूदा जलाल इन बातों से चिंतित नहीं हैं और इस साहसी महिला ने चुनाव लड़ने का संकल्प कर लिया है.

डॉक्टर जलाल मानती हैं कि ग़रीबी देश की सबसे बड़ी समस्या है. अपने अनुभवों का ज़िक्र करते हुए वो कहती हैं कि उनके मरीज़ उन्हें यही कहते हैं कि ग़रीबी ही उनकी बीमारी का कारण भी है.

मसूदा कहती हैं कि वे बीमारी का इलाज तो कर सकती हैं लेकिन ग़रीबी से निपटने के लिए उन्हें व्यापक अधिकारों की ज़रूरत है.

सहयोगी

वे काबुल में एक छोटे से घर से अपना चुनाव अभियान चला रही हैं. वो एक टोयोटा जीप में बैठकर चुनाव रैलियों में जाती हैं और छोटे-छोटे गुटों में लोगों को संबोधित करती हैं.

उप राष्ट्रपति पद के लिए उनके साथ हैं पचहत्तर वर्षीय मीर हबीब सुहैली जो विज्ञान पढ़ाते हैं.

सुहैली ख़ुद कहते हैं कि डॉक्टर जलाल राजनेता भले न हों लेकिन वे साहसी महिला ज़रूर हैं जो देश में सुधारवादी परिवर्तन ला सकती हैं.

देश भर से कबायली नेता उनसे मुलाक़ात करने पहुँच रहे हैं. हाल में ग़ज़नी प्रांत के एक गांव में उन्होंने लगभग 300 धार्मिक नेताओं से मुलाक़ात की.

तालेबान
तालेबान के हमलों का ख़तरा भी है

डॉक्टर जलाल का कहना है कि लोगों के साथ मुलाक़ात के दौरान उन्होंने पाया कि लोग लड़ाई से तंग आ चुके हैं और चाहते हैं कि कबायली लड़ाकू नेताओं से उन्हें छुटकारा मिले.

डॉक्टर मसूदा जलाल उन उम्मीदवारों में से हैं जिन्होंने सबसे पहले अपने चुनावी घोषणापत्र प्रकाशित किए हैं.

वो वादा करती हैं कि उनकी सरकार में तकनीकी विशेषज्ञों और पढ़े-लिखे लोगों को जगह मिलेगी.

साथ ही वो यह वादा भी कर रही हैं कि वो महिलाओं को रोज़गार उपलब्ध करवाएँगी और मादक पदार्थों की तस्करी के ख़िलाफ़ मुहिम शुरु करेंगी.

विश्लेषक डॉक्टर मसूदा जलाल की जीत की संभावना कम ही मानते हैं लेकिन उनके इरादों और इमानदारी पर शक़ की उँगली नहीं उठाई जा रही.

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