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मंगलवार, 10 अगस्त, 2004 को 16:28 GMT तक के समाचार
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अफ़ग़ान चुनाव:कुछ उम्मीदवार
अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव प्रचार
कई उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं
अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति पद के लिए नौ अक्तूबर को होने वाले चुनाव में 18 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.

इस पद के लिए कुल 23 लोगों ने दावा किया था जिसमें तीन के पर्चे चुनाव अधिकारियों ने ख़ारिज कर दिए जबकि दो ने पहले ही नाम वापस ले लिया था.

अंतरिम राष्ट्रपति हामिद करज़ई सबसे लोकप्रिय उम्मीदवार हैं लेकिन तीन अन्य उम्मीदवारों से उनको कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है.

कुछ महत्वपूर्ण उम्मीदवारों का परिचय यहाँ प्रस्तुत है.


हमिद करज़ई

46 वर्षीय हामिद करज़ई इस समय अफ़ग़ानिस्तान के अंतरिम राष्ट्रपति हैं और उन्हें जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है.

करज़ई तालेबान का गढ़ माने जाने वाले कंधार इलाक़े के पश्तून समुदाय से हैं. उन्होंने देश और विदेशों में अच्छा नाम कमाया है.

हामिद करज़ई

करज़ई सुशिक्षित हैं और चाल-ढाल में पश्चिमी संस्कृति के काफ़ी नज़दीक हैं और बहुत से देश उन्हें अफ़ग़ानिस्तान के शासन के लिए बहुत उपयुक्त मानते हैं.

लेकिन करज़ई के सामने कई मज़बूत उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं इसलिए ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे पहले दौर में ही जीत हासिल कर लेंगे या फिर कहीं हार का सामना तो नहीं करना पड़ जाएगा.


अब्दुल रशीद दोस्तम

उज़्बेक कमांडर अब्दुल रशीद दोस्तम को करज़ई के सामने काफ़ी मज़बूत उम्मीदवार माना जा रहा है.

कई लड़ाइयाँ देख चुके और मज़बूत योद्धा माने जाने वाले दोस्तम को उज़्बेक समुदाय के वोट भारी संख्या में मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है.

अब्दुल रशीद दोस्तम

लेकिन जनरल दोस्तम के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह अफ़ग़ानिस्तान की जटिल व्यवस्था में अक्सर अपनी वफ़ादारी बदलते रहे हैं और इसी से वह तमाम मुश्किलों के बावजूद जीवित रहने में कामयाब रहे हैं.

पिछले क़रीब तीन दशक दौरान दोस्तम सोवियत सेनाओं के पक्ष में और उनके ख़िलाफ़ भी लड़े चुके हैं.

उन्होंने तालेबान को भी समर्थन दिया और जब उत्तरी गठबंधन ने तालेबान के ख़िलाफ़ लड़ाई शुरू की तो उसमें भी उनका साथ दिया.


यूनुस क़ानूनी

पूर्व शिक्षा मंत्री यूनुस क़ानूनी उत्तर गठबंधन के एक प्रमुख नेता हैं जिन्होंने 2001 में तालेबान को उखाड़ फेंकने में अमरीका का साथ दिया.

उन्हें ताक़तवर माने जाने वाले रक्षा मंत्री मोहम्मद फ़हीम का समर्थन भी हासिल है.

यूनुस क़ानूनी

एक बार तो यह भी चर्चा थी कि मोहम्मद फ़हीम ख़ुद भी करज़ई के सामने खड़े होने वाले थे.

यूनुस क़ानूनी को अपने पुश्तैनी पंजशीर क्षेत्र में ताजिकों के समर्थन का पूरा भरोसा है.

लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रव्यापी तौर पर उनका असर सीमित ही है.


मोहम्मद मोहक़िक़

मोहम्मद मोहक़िक़ मध्य अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद शिया हज़ारा समुदाय से हैं और इस समुदाय के लोगों की संख्या ज़्यादा नहीं है.

मोहक़िक़ का संबंध मशहूर मज़ारे शरीफ़ स्थान से है.

ज़्यादातर उम्मीदवारों की ही तरह मोहम्मद मोहक़िक़ भी आज़ाद उम्मीदवार हैं.

हज़ारा समुदाय में मोहक़िक़ के भारी संख्या में समर्थक हैं और उन्हें इस समुदाय से भारी वोट मिलने की संभावना है.

हज़ारा समुदाय के बहुत से लोग ईरान और पाकिस्तान में शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं.


डॉक्टर मसूदा जलाल

राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले इस चुनाव में डॉक्टर मसूदा जलाल एक मात्र महिला उम्मीदवार हैं.

उन्हें लोकप्रियता को काफ़ी मिलने की संभावना है लेकिन उन्हें जीत के बहुत नज़दीक नहीं माना जा रहा है.

डॉक्टर मसूदा जलाल

डॉक्टर मसूदा जलाल एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं और काबुल की रहने वाली हैं.

तालेबान शासन के ख़ात्मे के बाद हुई लोया जिरगा में डॉक्टर मसूदा जलाल ने हामिद करज़ई को चुनौती दी थी जिससे वे चर्चा में आईं.

डॉक्टर मसूदा जलाल के महिलाओं के वोट भारी संख्या में मिलने की संभावना है और महिलाओं की आबादी देश में कुल आबादी का क़रीब एक तिहाई हिस्सा है.


अहमद शाह अदमदज़ई

अहमद शाह अदमदज़ई पेशे से इंजीनियर हैं और धार्मिक रूप से कट्टरपंथी माने जाते हैं.

वह पूर्व मुजाहिदीन नेता और कट्टरपंथी अब्दुल रसूल सय्याफ़ के सहयोगी थे और देश के पूर्व प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं.

अहमद शाह अदमदज़ई एक पश्तून हैं और देश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में वह करज़ई के कुछ वोट काट सकते हैं.

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अहमद शाह अदमदज़ई परंपरावादी पश्तून इलाक़ों में अमरीका विरोधी भावनाओं के आधार पर कुछ वोट बटोर सकते हैं.


सैयद इशाक़ ग़ैलानी

सैयद इशाक़ ग़ैलानी भी बहुसंख्या वाले पश्तून समुदाय से ही हैं और देश के बहुत असरदार माने जाने वाले धार्मिक ख़ानदान से हैं.

सैयद इशाक़ ग़ैलानी

सैयद इशाक़ ग़ैलानी राजशाही के प्रबल समर्थक रहे हैं और उन्होंने पूर्व शासक ज़ाहिर शाह की व्यापक भूमिका की हिमायत करते हुए बड़ा अभियान चलाया था.

सैयद इशाक़ ग़ैलानी अंतरिम राष्ट्रपति हामिद करज़ई और देश में अमरीका की भूमिका के कट्टर आलोचक रहे हैं.

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