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पंजीकरण करा रहे हैं अफ़ग़ान शरणार्थी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में रहने वाले अफ़ग़ान शरणार्थी राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेने के लिए अपना पंजीकरण करा रहे हैं. इसी सप्ताह संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि ईरान और पाकिस्तान में रहने वाले अफ़ग़ान शरणार्थियों का मतदान में 10 फ़ीसदी हिस्सा हो सकता है. पाकिस्तान में रहने वाले छह से आठ लाख़ अफ़ग़ानी शरणार्थी राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा ले सकते हैं. जबकि ईरान में भी चार से छह लाख अफ़ग़ान शरणार्थी रहते हैं जो मतदान कर सकते हैं. अधिकारियों ने दोनों देशों में शरणार्थी शिविरों के लिए ख़ास मतदान केंद्रों का इंतज़ाम किया है. ख़बरों में बताया गया है कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान और क्वेटा जैसे पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत में सैकड़ों अफ़ग़ानी मतदान के लिए अपना पंजीकरण करा रहे हैं. पहला मौक़ा एक अफ़ग़ानी महिला साजिदा इब्राहीम ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, "मेरे जीवन में पहली बार ऐसा मौक़ा आया है. हम चुनावी प्रक्रिया में ज़रूर हिस्सा लेंगे." युद्ध के कारण अफ़ग़ानिस्तान से हज़ारों लोग भाग कर पड़ोसी पाकिस्तान और ईरान में चले गए थे. अभी भी लाखों लोग अफ़ग़ान-पाकिस्तान सीमा पर बने शरणार्थी शिविर में रह रहे हैं. पंजीकरण की यह प्रक्रिया रविवार तक जारी रहेगी. हज़ारों स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी ईरान और पाकिस्तान में मतदान प्रक्रिया की देख-रेख कर रहे हैं. हालाँकि तालेबान सदस्यों ने अफ़ग़ानी लोगों को मतदान प्रक्रिया में भाग लेने से मना किया है. अंतरिम राष्ट्रपति हामिद करज़ई राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत के सबसे बड़े दावेदार हैं हालाँकि उनके ख़िलाफ़ 17 अन्य उम्मीदवार मैदान में हैं. |
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