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रूसी प्रस्ताव को ब्रिटेन का समर्थन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसमें कहा गया है कि संदिग्ध चरमपंथियों के क़ानून से बचने के लिए अन्य देशों में राजनीतिक शरण लेने के चलन पर रोक लगनी चाहिए. ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि चरमपंथियों को शरणार्थियों के लिए बने क़ानूनों का दुरूपयोग करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि ये क़ानून वाजिब शरणार्थियों के लिए बने हैं. जैक स्ट्रॉ ने संयुक्त राष्ट्र में कहा,"हम चरमपंथियों को ऐसी व्यवस्था का दुरूपयोग करने की अनुमति नहीं दे सकते जो पीड़ित होनेवालों की सुविधा के लिए बनाई गई है ना कि पीड़ित करनेवालों के लिए". उन्होंने कहा कि ब्रिटेन और रूस मिलकर सुरक्षा परिषद में एक नए प्रस्ताव को लाने की तैयारी कर रहे हैं. रूस ने संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव लाने का सुझाव दिया है जिसमें सभी देशों से इस सिलसिले में सहयोग की बात की गई है. प्रस्ताव रूसी प्रस्ताव के मसौदे में कहा गया है कि सभी देश मिलकर ये सुनिश्चित करें कि आतंकवाद के लिए ज़िम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सके. साथ ही इस प्रस्ताव में ये भी कहा गया है जहाँ ज़रूरत हो वहाँ संदिग्ध लोगों का जल्दी प्रत्यर्पण किए जाने की व्यवस्था की जाए. संवाददाताओं का कहना है कि रूस इस बात से बेहद नाराज़ है कि चेचन्या के दो विद्रोहियों, अख़मद ज़कायेव और इलियास अख़मादोव, को ब्रिटेन और अमरीका में शरण मिली हुई है. रूस ने बेसलान बंधक कांड के बाद चेचन विद्रोही नेताओं के प्रत्यर्पण की माँग की है. मगर ब्रिटेन सरकार ने कहा है कि कोई कार्रवाई करने से पहले उन्हें इस बात का प्रमाण चाहिए कि आख़िर उनपर आरोप किस कारण से लगाया जा रहा है. |
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