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'आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष की ज़रूरत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 59वें वार्षिक अधिवेशन के तीसरे दिन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का संबोधन हो रहा है. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार महासभा को संबोधित कर रहे हैं. अब तक दिए भाषण में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के विरुद्ध एक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की ज़रूरत पर बल दिया है. उम्मीद की जा रही है कि उनके भाषण में दो विषय सबसे महत्वपूर्ण रहेंगेः भारत-पाक संबंध और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सीट की दावेदारी. इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने बुधवार को महासभा में दिए गए अपने भाषण में भारत से संबंधों की बेहतरी की उम्मीद जताई. परवेज़ मुशर्रफ़ ने महासभा में कहा,"पाकिस्तान चाहता है कि भारत भी वह गंभीरता, लचक और साहस दिखाए जिसका प्रदर्शन पाकिस्तान कर रहा है".
भारतीय प्रधानमंत्री के साथ न्यूयॉर्क गए पत्रकारों का कहना है कि परवेज़ मुशर्रफ़ के भाषण पर भारतीय ख़ेमे में काफ़ी संतोष है. भारतीय दल को उम्मीद है कि इस बार के सत्र में दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों की तरह गरमा-गरमी नहीं है जिससे दोनों देशों के संबंधों पर बेहतर असर पड़ सकता है. ऐसा समझा जा रहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री अपने भाषण में ये भरोसा दिलाएँगे कि दोनों देशों के बीच जारी शांति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और भारत इस बारे में गंभीर रहेगा. सुरक्षा परिषद की दावेदारी इसके अतिरिक्त भारतीय प्रधानमंत्री अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र के स्वरूप पर महत्वपूर्ण टिप्पणी कर सकते हैं. भारत और कई अन्य देश मानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र को समय के साथ बदलना चाहिए और सुरक्षा परिषद के स्थाई और अस्थाई सदस्यों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए. भारत ने जर्मनी, जापान और ब्राज़ील के साथ मिलकर सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए दावेदारी पेश की है. इन चारों देशों में ये सहमति हुई है कि वे एक-दूसरे के दावे का समर्थन करेंगे. साथ ही ये देश यह भी चाहते हैं कि किसी अफ़्रीकी देश को भी स्थाई सदस्यता दी जानी चाहिए. |
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