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सोमवार, 13 सितंबर, 2004 को 13:16 GMT तक के समाचार
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पुतिन चाहते हैं प्रांतों पर अधिक नियंत्रण
व्लादिमीर पुतिन
पुतिन ने सुरक्षा प्रणाली और मज़बूत करने पर ज़ोर दिया है
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश की सुरक्षा व्यवस्था और उसके प्रशासन के तौर तरीकों में भारी परिवर्तन की ज़रूरत बताई है.

पूरे देश के क्षेत्रीय गवर्नरों और अपने मंत्रिमंडल के साथ हुई बैठक में उन्होंने ये प्रस्ताव रखा.

ये बैठक पिछले दिनों देश पर हुए 'आतंकवादी हमलों' पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी.

सुरक्षा रुस के लिए सबसे बड़ा मसला बन गया है. ख़ास तौर पर पिछले दिनों हुए बेसलान बंधक काँड के बाद पूरा देश और रूसी सरकार ऐसे हमलों और संकटों का मुक़ाबला करने के लिए नए तरीकों पर विचार विमर्श कर रहे हैं.

ऐसे में सोमवार को राष्ट्रपति पुतिन ने इस महत्त्वपूर्ण बैठक में विशेष तौर पर ज़ोर दिया उत्तरी कॉकेशस जैसे इलाकों के नियंत्रण को और बेहतर करने पर.

बेसलान की बात करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने फिर दुःख से डूबे हुए राष्ट्र को सांत्वना देने की कोशिश की और कहा, "मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि ऐसा कोई रूसी नागरिक नहीं होगा, ऐसा कोई परिवार नहीं होगा जिसने बेसलान बंधक काँड की पीड़ा अपनी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं समझी है. हम बिना भीगी आँखों के उन काले दिनों को याद भी नहीं कर पाते."

क्षेत्रीय गवर्नरों की नियुक्ति

भविष्य में ऐसे संकटों से कैसे निपटा जाए इसी बात पर विचार करते हुए राष्ट्रपति पुतिन का सुझाव था कि भविष्य में क्षेत्रीय गर्वनरों को मनोनीत किया जाए उनका चुनाव न हो.

 मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि ऐसा कोई रूसी नागरिक नहीं होगा, ऐसा कोई परिवार नहीं होगा जिसने बेसलान बंधक काँड की पीड़ा अपनी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं समझी है
व्लादिमीर पुतिन

वे डूमा यानि संसद के निचले सदन की भी चुनाव प्रक्रिया को बदलना चाहते हैं.

ऐसे कदमों से राष्ट्रपति पुतिन की स्थिति तो मज़बूत होगी लेकिन पहले से ही कमज़ोर विपक्ष को ये कदम और भी कमज़ोर कर सकता है.

राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय एकता के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली पर भी ज़ोर दिया.

पुतिन का कहना है कि उन सभी देशों में जहाँ आतंकवाद का ख़तरा है, ऐसी सुरक्षा प्रणाली काम कर रही है और ऐसी ही एक प्रणाली की ज़रूरत रूस को भी है.

पुतिन के अनुसार वह ऐसा तंत्र चाहते हैं जो अपराधियों को उनके ठिकानों पर ही खत्म कर दे.

राष्ट्रपति ने इस बात को स्वीकार किया कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ रुस की कार्रवाई अभी तक कारगर नहीं हुई है. उन्होंने साथ ही बेहतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत भी बताई.

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