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नरमी नहीं बरतेंगे: पुतिन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने उत्तरी ओसेतिया के एक स्कूल में हुए ख़ून-ख़राबे पर अपनी प्रतिक्रिया में साफ कर दिया है कि चेचन्या मुद्दे पर उनकी नीतियों में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है. बंधक संकट के मुद्दे पर राष्ट्र के नाम प्रसारण से कुछ ही देर पहले पुतिन घटनास्थल गए, और उस अस्पताल का दौरा करके इस बर्बर कांड की नंगी सच्चाई को अपनी आंखों से देखकर आए थे, जहाँ ख़ून-ख़राबे में बाल-बाल बचे मासूम बच्चे मौत से जूझ रहे हैं. टेलीविज़न पर जनता के नाम अपने इस प्रसारण में शपुतिन आशा के विपरीत काफ़ी संयत दिखाई दिए. ज़ाहिर है टेलिविज़न पर देखी गई तस्वीरों के मुक़ाबले हक़ीक़त का घिनौना चेहरा देखकर उन्हें अपनी उन नीतियों की सच्चाई का भी अंदाज़ा हुआ होगा जिन्हें लागू करके वे जनता को सुरक्षा नहीं दे पाए. इस ख़ून-ख़राबे की सारी ज़िम्मेदारी अपहर्ताओं के सर मढ़ते हुए पुतिन ने स्पष्ट करना चाहा कि बच्चों को कोई नुक़सान नहीं पहुंचाने के अपने वचन पर वे क़ायम रहे थे. उन्होंने, जैसी कि उम्मीद थी, ये आरोप भी लगाया कि इस ख़ून-ख़राबे में विदेशी चरमपंथियों का हाथ था. अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पुतिन का कहना था, “हम उस अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जूझ रहे हैं, जो रूस के ख़िलाफ़ सुनियोजित, बर्बर और पूरी ताक़त के साथ चलाया जा रहा है.” उन्होंने चेचेन्या के मुद्दे पर अपनी नीतियों को एक बार फिर सही ठहराते हुए ये भी स्पष्ट कर दिया कि उनकी नीतियों में कोई बदलाव नहीं आएगा.
लेकिन उन्होंने ये घोषणा ज़रूर की कि देश को बेहतर आपदा प्रबंधन के लिए तैयार किया जाएगा, सीमा पर और सख़्त नियंत्रण तथा सुरक्षा सेवाओं में भारी फेरबदल से सुरक्षा तंत्र को और कड़ा किया जायेगा. पुतिन ने पूर्व सोवियत संघ के समय की कड़ी सीमा नीतियों को फिर से लागू किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा, “हमारा देश के पास अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए कभी सबसे मज़बूत प्रतिरक्षा प्रणाली हुआ करती थी लेकिन अब वह अचानक इतना असुरक्षित हो गया है कि उसे कभी पूर्व से ख़तरे का सामना है और कभी पश्चिम से.” |
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