|
'आतंकवाद' के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस में बंधक कांड में मारे गए लोगों के शोक के बीच हज़ारों लोग आतंकवाद के विरुद्ध मॉस्को में एक रैली में शामिल हुए हैं. एकजुटता दिखाने के लिए लोग बैनर और पोस्टर हाथों में उठाए हैं. मगर संवाददाताओं का कहना है कि रूसी अधिकारियों ने जिस तरह इस कांड का सामना किया उसे लेकर लोगों में काफ़ी ग़ुस्सा भी है. इस कांड में 335 लोग मारे गए थे. इंटरफ़ैक्स समाचार एजेंसी ने अधिकारियों के हवाले से कहा है कि तक़रीबन एक लाख 30 हज़ार लोग इस रैली में शामिल हुए हैं. रैली में शामिल होने पहुँचे एक व्यक्ति ने कहा, "आप बच्चों को कैसे गोली मार सकते हैं. मैं इसलिए आया हूँ क्योंकि रूस के मुँह पर तमाचा मारा गया है और हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे." सभी लोगों ने स्थानीय समय के अनुसार शाम पाँच बजे एक मिनट का मौन रखा. अंतिम संस्कार उधर बेसलान में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार जारी है. लगभग दौ सौ लोगों का अंतिम संस्कार हो चुका है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चाहे आम रूसी इस समय राजनीतिक बहस में नहीं पड़ना चाहते हैं लेकिन कुछ का मानना है कि प्रदर्शन हाल के हादसे से ध्यान हटाने के लिए करवाए जा रहे हैं. दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति पुतिन से देश के भीतर तो सवाल पूछे ही जा रहे हैं, अब अन्य देशों के नेता भी सवाल कर रहे हैं कि आख़िर इस पूरे प्रकरण में क्या हुआ और चूक कहाँ हुई? एक बड़ा सवाल यह भी उठा है कि क्या चेचन विद्रोहियों से निपटने की पुतिन की नीति सही है? रूस के कई टीवी स्टेशनों ने विज्ञापनों का प्रसारण बंद कर दिया है और बंधक बनाए गए बच्चों से जुड़ी ख़बरें प्रसारित कर रहे हैं. सोवियत संघ के ज़माने की द्वितीय विश्व युद्ध से संबंधित फ़िल्में दिखाई जा रही हैं. माना जा रहा है कि ऐसा देश का मनोबल बढ़ाने और राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने के लिए किया जा रहा है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||