| 'जिहाद के नाम पर हत्या ग़लत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सऊदी अरब के एक प्रमुख पत्रकार ने उन मुस्लिम उलेमा पर हमला किया है जिन्होंने जिहाद के नाम पर मासूम लोगों की हत्या को उचित ठहराया है. अरब सैटेलाइट चैनल अल-अरबिया के संपादक अब्दुल रहमान अल राशिद ने रूस के बेसलान में हुए बंधक संकट पर टिप्पणी करते हुए ये कहा. इस कांड में सैकड़ों बच्चों और उनके परिजनों की मौत हो गई है. जब बेसलान स्कूल बंधक कांड त्रासदी की ओर बढ़ रहा था तब अब्दुल रहमान अल राशिद ने लिखा कि यह एक दुखद सच्चाई है कि सभी आतंकवादी मुसलमान हैं. उन्होंने विश्व में इस्लामी हिंसा के लिए अतिवादी मुसलिम धार्मिक नेताओं को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि इन लोगों ने एक शांतिप्रिय धर्म का ही अपहरण कर लिया है. 'अंदर झाँककर देखें' अल राशिद को ऐसे प्रभावशाली पत्रकारों में गिना जाता है जो अरब समाज से अपील करते रहे हैं कि वो अपनी मुसीबतों के लिए बाहरी दुनिया को दोष देने के बजाय अपने दामन में झाँककर अपनी समस्याओं का खुले दिमाग से आकलन करे. मगर अल राशिद की राय आम जनता की राय को प्रतिध्वनित नहीं करती. दरअसल कई लोग सोचते हैं कि चेचन्या हो या फ़लस्तीन मुसलमान ही सरकारों द्वारा प्रायोजित हिंसा का शिकार हो रहे हैं. ऐसा सोचने वाले लोग ज़ाहिर हैं अल राशिद की राय से नाराज़ होंगे. वैसे अगर अल राशिद की टिप्पणी पर ग़ौर करें तो लगता है कई और लोगों की तरह वह यही कह रहे हैं कि समस्या इस्लाम में नहीं बल्कि चंद मुसलमानों में हैं. मगर यह दलील इस बात का कोई जवाब नहीं दे पाती कि जिन अतिवादी धार्मिक नेताओं की वह आलोचना करते हैं वे इतने लोकप्रिय कैसे हैं. |
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