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इराक़ में सुरक्षा चिंताएँ, छोटा रहेगा दल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में शिया नेता मुक़्तदा अल-सद्र और अमरीकी सेना के बीच चल रहे संघर्ष को ख़त्म करने के लिए जाने वाले इराक़ी प्रतिनिधिमंडल का आकार सुरक्षा चिंताओं की वजह से छोटा रखने का फ़ैसला किया गया है. पहले जहाँ ये संख्या 50 से भी अधिक बताई जा रही थी वहीं अब 10 से कम ही लोगों को भेजना तय हुआ है. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अल-सद्र के रिश्तेदार हुसैन अल-सद्र को सौंपा गया है. अभी इस बारे में कोई ब्यौरा नहीं दिया गया है कि वे लोग वहाँ पहुँचेंगे कैसे. सुरक्षा चिंताओं की ही वजह से प्रतिनिधिमंडल को भेजने में समय भी लग रहा है. इसके अलावा अल-सद्र के प्रवक्ता ने अल-सद्र समर्थक लड़ाकुओं और अमरीकी सैनिकों के बीच संघर्ष ख़त्म करने के लिए वेटिकन सिटी की ओर से आए मध्यस्थता के प्रस्ताव का स्वागत किया है. इससे पहले अल-सद्र के एक प्रवक्ता ने कहा है कि वह शांति की किसी भी पहल पर बात करने के लिए तैयार हैं. इराक़ में नेशनल एसेंबली के चुनाव के लिए हो रहे राष्ट्रीय सम्मेलन में दूसरे दिन सोमवार को भी नजफ़ में संघर्ष का मुद्दा छाया रहा. देश में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले 100 सदस्यीय अंतरिम परिषद के गठन का काम अब भी बाक़ी ही है. इस सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने शिया नेता मुक़्तदा अल-सद्र से अपील की है कि वे नजफ़ में विद्रोह बंद करके राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल हो जाएँ. इस सम्मेलन में देश भर से आए लगभग एक हज़ार इराक़ी प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. इस बीच इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि अशरफ़ जहाँगीर क़ाज़ी ने भी मुक़्तदा अल सद्र और अमरीकी सेनाओं के बीच सुलह सफ़ाई में मध्यस्थता की पेशकश की है. उधर इराक़ में पत्रकारों को नजफ़ शहर छोड़ने के लिए कहा गया. शहर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, "अब से ये शहर बंद है." इसके बाद भी अगर कोई पत्रकार वहीं रहने का फ़ैसला करता है तो उसे गिरफ़्तार किया जा सकता है. |
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