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ग्वांतनामो बे के बंदियों की समीक्षा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्यूबा में अमरीकी सैनिक अड्डे ग्वांतनामो बे में रखे गए बंदियों के मामलों की समीक्षा शुरू हो गई है. अमरीका के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने फ़ैसला सुनाया था कि ग्वांतनामो बे शिविर के क़ैदी अपने बंदीकरण को अमरीकी अदालतों में ही चुनौती दे सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने ग्वांतनामो बे शिविर के बंदियों के मामलों की समीक्षा विशेष सैन्य न्यायाधिकरणों से कराने की घोषणा की थी. इस व्यवस्था के तहत एक बंदी के मामले की समीक्षा तीन सैन्य अधिकारियों वाले एक न्यायाधिकरण ने शुक्रवार को की. हालाँकि न्यायाधिकरण ने उस बंदी का नाम ज़ाहिर नहीं किया है और न ही उसके मामले को सार्वजनिक किया गया है लेकिन एकर अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि यह सुनवाई क़रीब दो घंटे चली. न्यायाधिकरण ने इस पहलू पर विचार किया कि क्या इस बंदी को दुश्मन का लड़ाका समझते हुए बंदी रखा जाए या उसे आज़ाद कर दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक़ ग्वांतनामो बे शिविर के सभी क़रीब 600 बंदियों के मामलों की इसी तरह समीक्षा की जानी है. इन बंदियों को किसी वकील से मिलने की इजाज़त नहीं है लेकिन उन्हें किसी सैन्य अधिकारी के सामने अपनी बात कहने का मौक़ा दिया जा सकता है और न्यायाधिकरण में भी सैनिक अधिकारी ही होंगे. सभी बंदियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई करने से पहले समीक्षा के ज़रिए उनके मामले पर ग़ौर किया जाएगा. कुवैत के बंदियों की एक वकी क्रिस्टीन हस्की ने इस समीक्षा पर तसल्ली तो ज़ाहिर की लेकिन वह मायूस भी थीं क्योंकि उनकी नज़र में सैन्य न्यायाधिकरण में सुनवाई निष्पक्ष नहीं होगी. शुक्रवार की समीक्षा में बंदी ख़ुद न्यायाधिकरण में मौजूद था लेकिन पेंटागन के अनुसार किसी गवाह को वहाँ पेश नहीं किया गया. |
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