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बंदियों को अमरीकी क़ानूनी अधिकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि क्यूबा में अमरीकी शिविर ग्वांतनामो बे में रखे गए बंदी अब अपनी क़ैद को अमरीकी क़ानून व्यवस्था के तहत ही चुनौती दे सकते हैं. अमरीकी सर्वोच्च न्यायालय के इस फ़ैसले को बुश प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. तीन के मुक़ाबले छह के बहुत से दिए गए इस फ़ैसले के बाद अब ग्वांतनामो बे के बंदियों की तरफ़ से सैकड़ों अपीलें अमरीकी अदालतों में दायर हो सकती हैं. पहले एक अमरीकी निचली अदालत ने कहा था कि ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए बंदी अमरीकी क़ानून व्यवस्था के दायरे से बाहर हैं. अदालत ने इन बंदियों के बेक़सूर या क़सूरवार होने के बारे में कोई फ़ैसला नहीं दिया. सर्वोच्च न्यायालय ने ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए बंदियों के मानवाधिकारों और बिना आरोप निर्धारित किए दो साल से भी ज़्यादा समय तक बंदी रखने के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा है. ग्वांतनामो बे शिविर में इस समय क़रीब 600 बंदी रखे गए हैं और उनमें से अधिकतर को अफ़ग़ानिस्तान पर हमले के दौरान बंदी बनाया गया था. एक अलग लेकिन इसी मामले से जुड़े फ़ैसले में न्यायालय ने कहा कि अमरीका के ऐसे नागरिकों को बिना मुक़दमा चलाए बंदी रखा जा सकता है जिन्हें 'दुश्मन लड़ाके' की श्रेणी में रखा गया हो. लेकिन ऐसे बंदियों को भी अपनी क़ैद को अमरीकी अदालतों में चुनौती देने का अधिकार है. |
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