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अराफ़ात ने संबंधी को हटाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने फ़लस्तीनी प्रशासन में सुरक्षा और खुफ़िया संस्थाओं में फिर से फेरबदल किया है. उन्होंने अपने संबंधी मूसा अराफ़ात को फ़लस्तीनी सुरक्षा प्रमुख के पद से हटा दिया है. दूसरी ओर मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने कहा है कि वे अपने इस्तीफ़े पर क़ायम है. उनके बयान से लगता है कि प्रधानमंत्री क़ुरई और राष्ट्रपति अराफ़ात के बीच मतभेद बरकरार हैं. नई नियुक्ति अराफ़ात ने अपने संबंधी को पिछले शनिवार को इस पद पर नियुक्त किया था जिसके बाद से वहाँ विरोध हो रहा था. चरमपंथियों ने फ़लस्तीनी नेताओं पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विरोध किया था जिसमें हिंसा भी हुई थी. अब यासिर अराफ़ात ने फिर से हटाए गए ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल रज़क मजैदी को फिर से उनके पद पर नियुक्त कर दिया है. बीबीसी के यरूशलम संवाददाता का कहना है कि मूसा अराफ़ात को उनके पद से भले ही नीचे लाया गया है मगर अभी भी गज़ा में एक उच्च पद पर ही रहेंगे. मतभेद बरकरार बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यासिर अराफ़ात ने दरअसल प्रधानमंत्री अहमद करई के साथ मतभेदों को सुलझाने की कोशिशों के तहत अपना फ़ैसला वापस लिया है. ख़बरों से लगता है कि दोनों के बीच मतभेद बरकरार है. मतभेदों के चलते क़ुरई ने हाल में अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था लेकिन अराफ़ात ने उसे स्वीकार नहीं किया है. गज़ा की लगातार ख़राब हो रही क़ानून और व्यवस्था की स्थिति को लेकर सोमवार को फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री एहमद कुरैई ने मंत्रिमंडल की एक बैठक की. बैठक के बाद कुरैई ने कहा कि वो अभी भी इस्तीफ़ा देने के अपने फ़ैसले पर क़ायम हैं. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की एक टीम यासर अराफ़ात के साथ मतभेद ख़त्म करने के उद्देश्य से उनसे मिलने जाएगी. अब सबकी नज़रें होंगी अराफ़ात और मंत्रिमंडल की इस टीम की मुलाक़ात पर और इस बीच फ़लस्तीनी नेता यासर अराफ़ात के नेतृत्व का संकट जारी है. इस बीच गज़ा पट्टी में सुरक्षा सेवा में सुधार की माँग कर रहे फ़लस्तीनी चरमपंथियों और ख़ुफ़िया अधिकारियों के बीच लगातार दूसरी रात संघर्ष हुआ जिसमें कम-से-कम 12 लोग घायल हो गए. शनिवार को हिंसा की शुरूआत तब हुई जब फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने अपने एक निकट संबंधी मूसा अराफ़ात को सुरक्षा प्रमुख बना दिया. राजनीतिक संकट प्रधानमंत्री करई ने शुक्रवार को गज़ा पट्टी में कुछ महत्वपूर्ण लोगों के अपहरण के बाद अपने इस्तीफ़े की पेशकश की थी. उन्होंने कहा कि गज़ा में सुरक्षा की स्थिति अभूतपूर्व रूप से ख़राब है. जिन लोगों को अपहृत करने के बाद छोड़ दिया गया उनमें गज़ा के पुलिस प्रमुख ग़ाज़ी जबाली और चार फ़्रांसीसी सहायताकर्मी भी शामिल हैं. यासिर अराफ़ात ने करई का इस्तीफ़ा ठुकरा दिया और करई को समझाने की कोशिश भी की मगर करई अपने फ़ैसले पर अड़े रहे. अराफ़ात ने इससे पहले गज़ा में सुरक्षा में व्यापक बदलाव किए और विभिन्न सेवाओं की संख्या घटाकर आठ से तीन कर दी जिसकी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ लंबे समय से माँग कर रहे थे. यरूशलम स्थित बीबीसी संवाददाता डेविड चज़ान का कहना है कि गज़ा का संकट यासिर अराफ़ात के लिए एक गंभीर चुनौती पैदा कर सकता है और कई फ़लस्तीनी अधिकारियों को ये आशंका है कि इस संकट से राजनीतिक अस्थिरता खिंच सकती है. |
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