|
गज़ा में विरोध प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य पूर्व में गज़ा पट्टी में हज़ारों फ़लस्तीनियों ने आपातकाल की घोषणा के बावजूद रोष प्रदर्शन किए हैं. वे फ़लस्तीन की सुरक्षा सेवाओं में फेरबदल और नई नियुक्तियों से नाराज़ हैं. फ़लस्तीन में हाल में हुई अपहरण की घटनाओं के बाद फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने सुरक्षा सेवाओं में फेरबदल किया. लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अराफ़ात के रिश्तेदार मूसा अराफ़ात को सुरक्षा सेवा का प्रमुख बनाने से न तो धांधलियाँ ख़त्म होंगी और न ही सुधार हो पाएँगे. उधर फ़लस्तीनी मंत्रिमंडल की एक आपात बैठक में प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए और अधिकारों की माँग की. इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया लेकिन अराफ़ात ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. प्रदर्शन गज़ा शहर में प्रदर्शनकारियों की रैली में बहुत सारे सशस्त्र नकाबपोश चरमपंथी भी शामिल थे. प्रदर्शन के दौरान कड़े शब्दों में आरोप लगाए गए कि नवनियुक्त अधिकारी रिश्वतखोर हैं. इस प्रदर्शन में लगभग 2000 लोगों ने भाग लिया. ये स्पष्ट था कि गज़ा में हाल में हुए अपहरणों के कारण फ़लस्तीन में राजनीतिक संकट पैदा हो गया है. अपहरण फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने किए जो कि आम तौर पर इसराइलियों को अपना निशाना बनाते हैं. उनकी माँग थी कि यासिर अराफ़ात अपने प्रशासन में चल रहे भ्रष्टाचार पर काबू पाएँ. राजनीतिक संकट और सुधार फ़लस्तीनी प्रशासन इस समय बड़े राजनीतिक संकट से गुज़र रहा है. सुरक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों के तहत अब आठ विभागों की जगह सिर्फ़ तीन विभाग होंगे. यासिर अराफ़ात चाहते हैं कि अहमद क़ुरई और उनका मंत्रिमंडल काम करता रहे. दूसरी ओर प्रधानमंत्री क़ुरई ने गज़ा में भारी अव्यवस्था की शिकायत की है. वे चाहते हैं कि इस स्थिति से निपटने के लिए उन्हें और अधिक अधिकार दिए जाएँ. शुक्रवार को गज़ा में चार फ़्रांसिसी नागरिकों का अपहरण कर लिया गया था और ख़ुद पुलिस प्रमुख का भी अपहरण हो गया था. फ़लिस्तीनी सुरक्षासेवा के दो वरिष्ठ अधिकारियों - अमीन अल-हिंदी और राशिद अबू शबाक ने अपहरण की घटनाओं के बाद इस्तीफ़ा देने की पेशकश की थी, जिसे अराफ़ात ने ठुकरा दिया है. इस घटनाक्रम के बाद यासिर अराफ़ात पर फ़लस्तीनी प्रशासन में सुधार कार्यक्रम लागू करने का दबाव बढ़ गया है. यह दबाव अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की ओर से भी है और फ़लस्तीनी प्रशासन के आलोचकों की ओर से भी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||