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पावेल मिले उत्तर कोरियाई मंत्री से | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में शुरु हुए आसियान सम्मेलन की एक ख़ास बात यह रही कि इस मौक़े पर अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पावेल की उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री पेक नाम सुन से मुलाक़ात हो गई. बीस मिनट चली इस बैठक के बाद अमरीकी अधिकारियों ने इसे उपयोगी और प्रगति की राह में एक ठोस क़दम बताया. उनका कहना था कि दोनों नेताओं ने पिछले सप्ताह बेइजिंग में छह पक्षों की बातचीत के अंतिम दौर में रखे गए प्रस्तावों की चर्चा की.
पावेल ने अमरीका के इन प्रस्तावों को दोहराया कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म करदे. लेकिन बातचीत के तुरंत बाद उत्तर कोरिया ने जो वक्तव्य जारी किया वह काफ़ी सतर्कतापूर्ण था. उसमें कहा गया कि यदि अमरीका द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने का इच्छुक है तो उत्तर कोरिया भी उसे एक स्थाई दुश्मन नहीं मानेगा. लेकिन साथ ही यह भी कहा गया कि कोई भी प्रगति अमरीका की नीति में बदलाव पर ही निर्भर करती है. आसियान में उभरे मतभेद उधर, आसियान की बैठक की शुरुआत में ही बर्मा पर मतभेद खुल कर सामने आने लगे. बैठक में दक्षिणपूर्व एशियाई देशों और उन अन्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं जिनके इस क्षेत्र से सामरिक हित जुड़े हुए हैं. हिस्सा लेने वाले देशों में भारत, अमरीका, रूस, जापान, उत्तर और दक्षिण कोरिया, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं. गुट ने पाकिस्तान को अपना चौबीसवाँ और सबसे नया सदस्य स्वीकार किया है. |
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