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तुर्की ने झुकने से इनकार किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तुर्की सरकार ने उन इराक़ी चरमपंथियों की माँगे आगे झुकने से इनकार कर दिया है जिन्होंने तीन तुर्की लोगों को बंधक बना लिया है और उनकी हत्या की धमकी दी है. अल क़ायदा से संबंधों के संदिग्ध एक संगठन ने धमकी दी थी कि अगर तुर्की इराक़ से अपना नाता नहीं तोड़ता तो शनिवार को अपहृत किए हुए इन तीन तुर्कों की 72 घंटे के अंदर हत्या कर दी जाएगी. तुर्की के रक्षा मंत्री वेक्दी गोनुल ने रविवार को कहा कि उनका देश चरमपंथियों के आगे नहीं झुकेगा और उन्हें किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी. अरबी टेलीविज़न चैनल ने तुर्की के लोगों के अपहरण की ख़बर दिखाई थी. इस रिपोर्ट के वीडियो में तीन लोगों को नक़ाबपोश चरमपंथियों से घिरे हुए दिखाया गया था. वीडियो में ये तीन लोग नक़ाबपोशों के सामने घुटनों के बल बैठे हैं और उनके हाथों में तुर्की पासपोर्ट है. माना जा रहा है कि इन चरमपंथियों का संबंध अबू मुसाब अल ज़रक़ावी से है. वीडियो में बंदियों के पीछे की दीवार पर एक काला झंडा लगा हुआ है जिस पर ज़रक़ावी के संगठन का नाम "तौहीद और जिहाद" लिखा हुआ है. साथ में दिए गए संदेश में कहा गया है कि तुर्की की फ़र्में इराक़ से 72 घंटों में पीछे हट जाएँ वरना इन लोगों को मार दिया जाएगा. उन्होंने तुर्कीवासियों से इस्तांबुल में होने वाली नैटो की बैठक का विरोध करने और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के ख़िलाफ प्रदर्शन करने को भी कहा है. इस बैठक में राष्ट्रपति बुश इराक़ में स्थायित्व के लिए नैटो गठबंधन की मदद लेने की कोशिश करेंगे. तुर्क कामगार बग़दाद में तुर्की उच्चायोग के एक अफ़सर ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि ये तीन लोग दो दिन पहले लापता हो गए थे.
प्रेक्षकों का कहना है कि इस अपहरण के बाद तुर्की में इराक़ युद्ध के ख़िलाफ माहौल और गर्मा जाएगा. तुर्की शुरूआत से ही इराक़ में युद्ध के विरूद्ध था और उसने इराक़ में अपनी सेना भेजने से भी इनकार कर दिया था. लेकिन इराक़ में कई तुर्क ठेकेदार ड्राईवर और अमरीकी सेना के लिए सहयोगी स्टाफ़ के तौर पर काम कर रहे हैं. धोखे के आरोप ज़रक़ावी का संगठन इससे पहले दो और बंदियों - अमरीकी नागरिक निक बर्ग और दक्षिणी कोरिया के किम सुन इल की हत्या की ज़िम्मेदारी ले चुका है. दोनों हत्याओं के फोटो इस्लामिक वेबसाइटों पर लगाए गए थे. मारे गए किम सुन का पार्थिव शरीर शनिवार को उनके गृहनगर बुसान पहुँचा. 33 साल के इस अनुवादक की स्मृति में दक्षिणी कोरिया की राजधानी सोल में आयोजित 'कैंडिललाईट विजिल' में छह हज़ार लोगों ने भाग लिया. जब उनका अपहरण किया गया तब किम सुन अमरीकी सेना को आपूर्ति करने वाली एक सुरक्षा कंपनी में काम करते थे. दक्षिण कोरिया ने इराक़ में 3000 सैनिकों की तैनाती का फ़ैसला बदल देने की अपहर्ताओं की माँग मानने से इनकार कर दिया था. इसके बाद किम सुन का शव 22 जून को बग़दाद और फलूजा के बीच की सड़क पर पाया गया. किम सुन को छुड़ाने में असफल रही सरकार से उनका परिवार काफी नाराज़ है और सरकार पर धोखा देने का आरोप लगा रहा है. |
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