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'इराक़ युद्ध से मज़बूत हुआ अल क़ायदा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
युद्ध और सामरिक मामलों का अध्ययन करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ़ स्ट्रेटेजिक स्टडिज़ का कहना है कि इराक़ हमले के बाद आतंकवादी संगठन अल क़ायदा को और मज़बूत होने का मौक़ा मिला है. इस रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इराक़ युद्ध के बाद पश्चिमी देशों और उनके ठिकानो पर आतंकवादी हमले का ख़तरा और बढ़ गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-क़ायदा के क़रीब 18 हज़ार आतंकवादी दुनियाभर के 60 देशों में मौजूद है और वे कभी भी पश्चिमी देशों के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं. हालाँकि अल क़ायदा के दो हज़ार से भी ज़्यादा सदस्य और आधे से ज़्यादा नेता पकड़े जा चुके है. संसाधन संस्था का ये भी कहना है कि दुनियाभर में अपने सदस्यों को रखने के लिए अल-क़ायदा के पास पर्याप्त संसाधन भी है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय इराक़ में क़रीब एक हज़ार अल क़ायदा सदस्य सक्रिय हैं और दुसरे विद्रोहियों के साथ मिलकर वो गठबंधन सेना के ख़िलाफ़ लड़ रहे है. बीबीसी के मध्य-पूर्व मामलों के विश्लेषक रॉजर हार्डी कहते है कि रिपोर्ट के मुताबिक़ इराक़ में तैनात अमरीकी सैनिक अमरीका के बाहर अल-क़ायदा के सबसे बड़े निशाना हैं. संस्था का कहना है कि स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हुए बम हमलों से ये ज़ाहिर होता है कि अफ़ग़ानिस्तान में भी अल-क़ायदा ने अपने आप को फिर संगठित कर लिया है और अब उनकी नज़रें अमरीका और उसके सहयोगियों पर लगी है. इसके अलावा रिपोर्ट में इस्लाम और पश्चिमी देशों के बीच रिश्तों के बारे में भी कहा गया है. संस्था ने कहा है कि आने वाले कुछ महीनों में अल-क़ायदा और उससे जुड़े बाक़ी आतंकवादी गुट अमरीका, यूरोप और इसराइली नागरिकों पर हमला करने की कोशिश करेगें. |
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