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यूरोपीय संसद के चुनाव, सत्ता पक्ष पीछे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ के संसदीय चुनाव में एक ओर तो बहुत कम मतदान हुआ है दूसरी ओर प्रारंभिक नतीजों से सत्तारूढ़ पार्टियों को झटका लगता दिख रहा है. विपक्षी पार्टियाँ बढ़त बनाए हुए हैं. जर्मनी, फ़्रांस और पोलैंड में जहाँ सरकारों को बड़ा नुक़सान हो रहा है वहीं कई ऐसी पार्टियों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है जिनको यूरोपीय संघ में विश्वास ही नहीं है. यूरोपीय संघ के संसदीय चुनावों में जहाँ कुल मिलाकर 44.2 प्रतिशत ही मतदान हुआ है, वहीं नए 10 देशों में मतदान का प्रतिशत सिर्फ़ 26 प्रतिशत है. विश्लेषकों का कहना है कि मध्यमार्गी और दक्षिणपंथी रुख़ रखने वाली पार्टियाँ नई संसद में सबसे बड़े गुट के रूप में उभरेंगी. शुरुआती नतीजों के अनुसार जर्मनी में सत्तारूढ़ सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे बड़ी हार की और बढ़ रही है. मतदान के हिसाब से उन्हें सिर्फ़ 20 प्रतिशत मत मिलते दिख रहे हैं जबकि क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स आसानी से जीत की और बढ़ते दिख रहे हैं. फ़्रांस के राष्ट्रपति ज्याक़ शिराक की पार्टी को भी सिर्फ़ साढ़े सोलह फ़ीसदी मत मिलते दिख रहे हैं और वह सोशलिस्ट पार्टी के लगभग 30 फ़ीसदी मतों से पीछे है. इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बरलुस्कोनी को भी झटका लगा है क्योंकि उनकी पार्टी को मिलने वाले मत का प्रतिशत भी कम हुआ है. मतदाता दूर 25 देशों के 35 करोड़ मतदाताओं में से 15.5 करोड़ मतदाताओं ने दुनिया की इस सबसे बड़ी प्रजातांत्रिक कार्रवाई में भाग लिया है. यूरोपीय संघ के 25 देशों में से 19 में रविवार को मतदान हुआ था जबकि छह देशों में पहले ही मतदान हो चुका था. ब्रसेल्स में मौजूद बीबीसी के टिम फ़्रैंक्स ने चार दिन चले इस मतदान को कम मत प्रतिशत वाला और यूरोप भर में अपने-अपने देशों की सरकार के विरुद्ध मत देने वाला बताया है. संवाददाता के अनुसार जैसे-जैसे संसद शक्तिशाली होती जा रही है वैसे-वैसे मतदाता इससे दूर होते जा रहे हैं. |
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