| सऊदी अरब में बड़ा तलाशी अभियान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सऊदी अरब के सुरक्षा बलों ने उन चरमपंथियों को पकड़ने के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ा है जो रविवार के अभियान से बच निकलने में कामयाब हो गए थे. सोमवार को छेड़े गए अभियान में ख़ोबर शहर में जगह-जगह नाके बनाए गए हैं. सऊदी अरब के ख़ोबर शहर में बंधकों को छुड़ाने के लिए रविवार को हुई कमांडो कार्रवाई की सफलता पर सवाल उठने लगा थे कि कड़ी सुरक्षा के बावजूद कुछ चरमपंथी भागने में कैसे कामयाब हो गए. लेकिन सऊदी अधिकारियों ने कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे पूरी तरह सफल बताया था. दरअसल इस कार्रवाई के दौरान 40 से ज़्यादा बंधकों को छुड़ा तो लिया गया लेकिन कड़ी घेराबंदी के बावजूद कुछ चरमपंथी भागने में कामयाब हो गए थे. पहले ख़ोबर में हुए चरमपंथी हमले और फिर बंधक संकट के दौरान 22 लोग मारे गए थे जिनमें से ज़्यादातर विदेशी थे. वहाँ चरमपंथियों ने पचास से भी ज़्यादा लोगों को बंधक बना लिया था जिनमें ज़्यादातर विदेशी थे. मारे गए लोगों में कुछ भारतीय भी हैं. रियाद स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी जेएस मुकुल ने पाँच भारतीय लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है. लेकिन कुछ एजेंसियों पर मृतक भारतीयों की संख्या आठ बताई जा रही है. 'सफल कार्रवाई' सऊदी अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह सफल रही और चरमपंथियों के मुखिया को पकड़ लिया गया है लेकिन वह घायल है.
हालाँकि उन्होंने इस पर कुछ नहीं कहा कि इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद किस तरह कुछ चरमपंथी भाग गए. बीबीसी के मध्य पूर्व संवाददाता का कहना है कि कुछ चरमपंथियों के भागने से सऊदी सुरक्षाबलों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं. कुछ छुड़ाए गए बंधकों का कहना है कि विशेष कमांडो दस्ते उस समय इमारत में घुसे जब नौ बंधकों ने भागने की कोशिश की लेकिन वे पकड़े गए और उनकी गर्दनें काट दी गईं. चरमपंथी संगठन अल क़ायदा से जुड़ी एक अरबी वेबसाइट ने एक बयान छापा है जिसमें अल क़ायदा ने ख़ोबर में हुई हिंसा की ज़िम्मेदारी ली है. |
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