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सऊदी अरब में कार्रवाई पर सवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सऊदी अरब के ख़ोबर शहर में बंधकों को छुड़ाने के लिए हुई कमांडो कार्रवाई की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि कड़ी सुरक्षा के बावजूद कुछ चरमपंथी भागने में कामयाब हो गए. लेकिन सऊदी अधिकारियों ने कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे पूरी तरह सफल बताया है. दरअसल इस कार्रवाई के दौरान 40 से ज़्यादा बंधकों को छुड़ा तो लिया गया लेकिन कड़ी घेराबंदी के बावजूद कुछ चरमपंथी भागने में कामयाब रहे. पहले ख़ोबर में हुए चरमपंथी हमले और फिर बंधक संकट के दौरान 22 लोगों की मौत हो गई जिनमें से ज़्यादातर विदेशी हैं. मारे गए लोगों में कुछ भारतीय भी हैं. रियाद स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी जेएस मुकुल ने पाँच भारतीय लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है. लेकिन कुछ एजेंसियों पर मृतक भारतीयों की संख्या आठ बताई जा रही है. 'सफल कार्रवाई' सऊदी अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह सफल रही और चरमपंथियों के मुखिया को पकड़ लिया गया है लेकिन वह घायल है.
हालाँकि उन्होंने इस पर कुछ नहीं कहा कि इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद किस तरह कुछ चरमपंथी भाग गए. बीबीसी के मध्य पूर्व संवाददाता का कहना है कि कुछ चरमपंथियों के भागने से सऊदी सुरक्षाबलों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं. कुछ छुड़ाए गए बंधकों का कहना है कि विशेष कमांडो दस्ते उस समय इमारत में घुसे जब नौ बंधकों ने भागने की कोशिश की लेकिन वे पकड़े गए और उनकी गर्दनें काट दी गईं. चरमपंथी संगठन अल क़ायदा से जुड़ी एक अरबी वेबसाइट ने एक बयान छापा है जिसमें अल क़ायदा ने ख़ोबर में हुई हिंसा की ज़िम्मेदारी ली है. |
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