|
रम्सफ़ेल्ड के बचाव में आए बुश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका और ब्रिटेन दोनों देशों की सरकारों ने इराक़ में क़ैदियों के साथ हुए अमानवीय बर्ताव पर उठाए गए क़दमों को सही ठहराया है. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड को हटाने के लिए दबाव बढ़ रहा है लेकिन बुश ने रम्सफ़ेल्ड का यह कहते हुए बचाव किया है कि वह अपना काम बहुत अच्छे तरीक़े से कर रहे हैं. बुश ने रम्सफ़ेल्ड की आलोचना सुनने से भी मना कर दिया. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि इराक़ी क़ैदियों के साथ अमानवीय बर्ताव के मामले की पूरी जाँच की जाएगी. उन्होंने इस बर्ताव को बहुत निर्दयी और असम्मानजनक बताया है. दूसरी तरफ़ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी इस मामले में रविवार को माफ़ी माँगी थी. सोमवार को ब्रिटेन के रक्षा मंत्री ज्यैफ़ हून ने इन आरोपों का खंडन किया कि सरकार ने इराक़ी क़ैदियों के साथ ब्रितानी सैनिकों के हाथों हुए अमानवीय बर्ताव के मामले में अनदेखी की है. हून ने संसद को बताया कि उन्हें रेडक्रॉस की फ़रवरी में तैयार की हुई रिपोर्ट हाल ही में देखी है. लेकिन आरोप लगाए जा रहे हैं कि रिपोर्ट में लगाए गए कुछ आरोपों के मामले में पहले से ही कार्रवाई की जा रही है. ज्यैफ़ हून ने कहा कि क़ैदियों के साथ हुए बर्ताव के बारे में तीस शिकायतों की जाँच की गई और उनमें से ज़्यादातर निराधार साबित हुईं. हून ने कहा कि इराक़ में क़ैदियों के साथ ब्रितानी सैनिकों के बर्ताव के मामले में रैडक्रॉस आमतौर पर संतुष्ट रहा है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||