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खुली रहेगी अबू ग़रेब जेल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी जेलों के नए प्रमुख जनरल ज्योफ्री मिलर ने कहा है कि क़ैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार के प्रकरण के बावजूद अबू ग़रेब जेल का इस्तेमाल जारी रहेगा. इराक़ी क़ैदियों के साथ अमरीकी सैनिकों के दुर्व्यवहार की तस्वीरें सामने आने के बाद इस जेल को बंद करने की माँग लगातार उठ रही है. मगर जनरल मिलर का कहना है कि अब जेनेवा संधि के सभी नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है. उधर जिन सात इराक़ी क़ैदियों को रिहा किया जाना था, वे शनिवार को काफ़िले पर हुए बम हमले में घायल हो गए. सैनिक अधिकारियों के अनुसार बग़दाद के पश्चिम में हब्बानिया के पास ये विस्फोट तब हुआ जब क़ैदियों को दूसरी जगह ले जाया जा रहा था. अमरीकी मरीन सैनिकों का कहना है कि अमरीकी सेना की फर्स्ट इंफेंटरी डिवीज़न के सैनिकों ने हमलावरों का पीछा किया और वे एक को मारने और दूसरे को गिरफ़्तार करने में सफल हो गए. अलग-अलग रिपोर्ट अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अपने साप्ताहिक रेडियो संदेश में एक बार फिर अबू ग़रेब में इराक़ी कैदियों के साथ अमानवीय बर्ताव की तस्वीरों को 'देश के सम्मान पर धब्बा' बताया.
उन्होंने कहा कि ये केवल इक्के-दुक्के मामले हैं. सभी अमरीकी सैनिक ऐसे नहीं हैं और वे पूरी ईमानदारी के साथ 'इराक़ के लिए बलिदान' दे रहे हैं. लेकिन रेड क्रास ने शुक्रवार को कहा कि ये इक्के-दुक्के मामले नहीं हैं बल्कि एक व्यापक समस्या का नमूना है. रेड क्रास के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि उनकी संस्था पिछले एक साल से अमरीका को इस तरह के मामलों के बारे में चेतावनी दे रही थी. लेकिन शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए जनरल मिलर ने कहा कि अबू ग़रेब में जो भी समस्या थी अब उसे सुलझा लिया गया है. उन्होंने कहा कि अब सभी इराक़ी क़ैदियों के साथ जेनेवा संधि के तहत ही सलूक़ किया जा रहा है. जनरल मिलर ने कहा, "हमारी जाँच से पता चला है कि जिस अमानवीय बर्ताव के आरोप लगाए गए हैं, उसकी वजह नेतृत्व के अभाव में नियमों का पूरी तरह पालन न किया जाना रही." उनका कहना था, "अब हम इसका ध्यान रखेंगे कि इन नियमों का पूरी तरह पालन हो." नियमों का उल्लंघन जनरल मिलर ने उस 30 सदस्यीय समिति का नेतृत्व किया था जो अगस्त और सितम्बर में अबू ग़रेब में सुविधाओं की जाँच करने गई थी. ग्वांतानामो बे में अपने अनुभवों के आधार पर इस समिति को वहाँ के कामकाज सुधारने के बारे में प्रस्ताव पेश करने थे. इस समिति ने कहा था कि सेना के अधिकारियों को पूछताछ करते समय क़ैदी की मानसिक स्थिति समझने की कोशिश करनी चाहिए. जनरल मिलर ने कहा कि उनकी समिति ने ये भी राय दी थी कि सेना पुलिस को केवल कैदियों को पूछताछ के लिए ले जाने और उनकी स्थिति देखने और जाँच करने की अनुमति होनी चाहिए. उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि सेना पुलिस को पूछताछ में इससे ज़्यादा भूमिका निभाने के लिए कहा गया था. उन्होंने कहा, "हमने पूरी तरह से अपने तरीक़े समझाए थे और मुझे इस बारे में कोई संदेह नहीं है कि वे पूरी तरह से हमारे प्रस्ताव समझ गए थे." अपने रेडियो संदेश में राष्ट्रपति बुश ने कहा कि इराक़ के सभी जेलों के कामकाज की जांच की जा रही है, जिससे इस तरह की शर्मनाक घटनाऐं दोबारा न हो सकें. |
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