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डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड को 'गहरा अफ़सोस' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी क़ैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार के मामले में अमरीका के रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने संसद के ऊपरी सदन में माफ़ी माँगते हुए कहा है इस घटना पर उन्हें 'गहरा अफ़सोस' है. रम्सफ़ेल्ड ने सीनेट की एक समिति के सामने कहा कि मैं "अमरीकी सैनिकों के व्यवहार के लिए जवाबदेह हूँ और इसके लिए दिल की गहराई से माफ़ी माँगता हूँ." मगर इस पूरे घटनाक्रम के बीच उन्होंने इस्तीफ़ा देने से ये कहते हुए इनकार कर गिया है कि वह किसी राजनीतिक दबाव में ये फ़ैसला नहीं लेंगे. रम्सफ़ेल्ड के बयान पर अमरीका के राजनीतिक दलों की तरफ़ से मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई है. विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर एडवर्ड केनेडी ने कहा है कि रम्सफ़ेल्ड की सुनवाई से कहीं कुछ नहीं बदला है और उन्हें हटाया जाना चाहिए. मगर रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर जॉन वार्नर ने कहा है कि वे रम्सफ़ेल्ड को उनके पद पर बनाए रखने के राष्ट्रपति बुश के फ़ैसले का समर्थन करते हैं. और तस्वीरों की संभावना अमरीकी सीनेट की समिति के सामने रमस्फ़ेल्ड की सुनवाई लगभग छह घंटे तक चली. उन्होंने समिति से ये भी कहा कि इराक़ी क़ैदियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में अभी और तस्वीरें और यहाँ तक कि एक वीडियोटेप भी सामने आ सकता है. उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जाँच की घोषणा की और कहा कि इसकी रिपोर्ट 45 दिनों के भीतर आ जाएगी. रम्सफ़ेल्ड ने कहा कि रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने जिस तरह से इस मामले में भूमिका निभाई है उसकी पूरी पड़ताल होगी.
रक्षा मंत्री ने कहा कि जब उन्होंने गुरुवार को तस्वीरें देखीं तब उन्हें स्थिति की गंभीरता का पता चला. उन्होंने ये भी कहा कि जो तस्वीरें दिखाई गई हैं उससे कहीं ज़्यादा तस्वीरें हैं. पद छोड़ने की माँग के बीच रम्सफ़ेल्ड ने कहा, "ये कहने की ज़रूरत नहीं है कि अगर मुझे लगा कि मैं प्रभावी भूमिका नहीं निभा पाउँगा तो मैं निश्चित रूप से पद छोड़ दूँगा." उन्होंने कहा कि वह पद नहीं छोड़ेंगे क्योंकि लोग इसे एक राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं. इस मामले में विपक्षी दल रम्सफ़ेल्ड से माँग करते रहे हैं कि वे इस्तीफ़ा दें, अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने गुरूवार को ही कह दिया था कि रम्सफ़ेल्ड को नहीं हटाया जाएगा. इससे पहले गुरूवार को राष्ट्रपति बुश ने भी इसी मामले में माफ़ी माँगी थी.
इस बीच अमरीकी जॉइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ जनरल रिचर्ड मायर्स ने इस बात से कड़ाई से इनकार किया कि इराक़ी क़ैदियों के मसले में कोई बात दबाने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि बग़दाद में अमरीकी सैनिक कमान ने जनवरी में ही घोषणा कर दी थी कि क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार के मसले में जाँच की जाएगी. जब उनसे ये पूछा गया कि उन्होंने पिछले सप्ताह मीडिया पर इस बात का दबाव क्यों डाला कि वे तस्वीरें न छापी जाएँ तो उनका कहना था कि वह मसले को दबाना नहीं चाह रहे थे बल्कि उन्हें लग रहा था कि अगर तस्वीरें छपीं तो इससे इराक़ में तैनात सैनिकों को ही नुक़सान होगा. जनरल मायर्स ने ये भी कहा कि इस बारे में उन्होंने राष्ट्रपति बुश, उपराष्ट्रपति डिक चेनी या रक्षा मंत्री से कोई बात नहीं की थी. रम्सफ़ेल्ड ने इराक़ी क़ैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार के कुछ महीनों पहले ही बग़दाद के अबू ग़रेब जेल का दौरा किया था. उन पर आरोप हैं कि उन्होंने स्थिति की गंभीरता को उसी समय नहीं महसूस किया. |
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