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अमरीकी टीवी कार्यक्रम से नया विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी टेलीविज़न के एक समाचार चैनल ने इराक़ युद्ध में मारे गए 700 से ज़्यादा अमरीकी सैनिकों के नाम और तस्वीरें अपने एक कार्यक्रम में दिखाकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. एबीसी टेलीविज़न पर दिखाए गए इस कार्यक्रम के प्रोड्यूसर का कहना है कि ये तस्वीरें दिखाने के पीछे उनका उद्देश्य दर्शकों को ये याद दिलाना था कि इराक़ युद्ध में मारे गए सैनिक सिर्फ़ एक संख्या नहीं थे बल्कि उनके नाम और चेहरे भी थे. कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता और अमरीकी पत्रकार टैड कौपेल का ये कहना था कि इस कार्यक्रम के ज़रिए राजनीति के गिरते स्तर और और रोज़मर्रा की पत्रकारिता को संभालने की कोशिश की गई है. उन्होंने साफ़ कहा कि इन 721 मृतकों के नामों की सूची पढ़ने का मक़सद न तो इराक़ युद्ध के ख़िलाफ़ हवा बनाना था, और न ही उसका समर्थन करना था. ग़ौरतलब है कि आलोचकों ने टैड कोपेल पर ये आरोप लगाये हैं कि वे इस कार्यक्रम के ज़रिए इराक़ युद्ध के प्रति विरोधी लहर भड़काने का प्रयास कर रहे थे. पिछले साल एक मई 2003 को अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के इराक़ युद्ध के आधिकारिक रूप से ख़त्म कर दिए जाने की घोषणा की बरसी की पूर्व संध्या पर ये कार्यक्रम दिखाया गया. प्रेरणा बताया जाता है कि इराक़ युद्ध में मारे गए अमरीकी सैनिकों के नाम और तस्वीरें दिखाने का विचार इस चैनल को 1969 की अमरीकी पत्रिका 'लाइफ़' के उस अंक से आया जिसने वियतनाम युद्ध में सिर्फ़ एक हफ्ते में मारे गये कई अमरीकी सैनिकों के नाम और तस्वीरें छाप कर सनसनी फैला दी थी. व्हाइट हाउस से जुड़ी मैरीलैंड स्थित एक मीडिया कंपनी सिंक्लेयर ने इस कार्यक्रम को राजनीति से प्रेरित और एकतरफ़ा घोषित करते हुए अपने चैनलों पर इसके प्रसारण की मनाही कर दी है. एरिज़ोना के रिपब्लिकन सेनेटर जॉन मैक्केन ने सिंक्लेयर के इस फैसले की निंदा करते हुये इसे देश विरोधी बताया है. |
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