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अराफ़ात निशाना हो सकते हैं- शेरॉन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन का कहना है कि वह अमरीका को किए गए उस वायदे से बँधे नहीं हैं जिसके अनुसार वह फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात को कोई नुक़सान नहीं पहुँचाएँगे. टेलीविज़न के एक साक्षात्कार में शेरॉन ने कहा कि पिछले सप्ताह वॉशिंगटन में उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से हुई मुलाक़ात में उनको इस परिवर्तन के बारे में सूचित कर दिया है. उधर अमरीकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अराफ़ात के बारे में अमरीकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है. इसराइल का आरोप है कि अराफ़ात फ़लस्तीनी चरमपंथियों को शह दे रहे हैं. इसराइल ने हाल ही में हमास के कई नेताओं को निशाना बनाया है. मगर अमरीका के दबाव में अब तक वह अराफ़ात को निशाना नहीं बना रहा था. 'प्रतिबद्धता से मुक्त' शेरॉन ने इसराइल के 'चैनल टू' से बातचीत में कहा कि तीन साल पहले अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से हुई मुलाक़ात में उन्होंने अराफ़ात को नुक़सान नहीं पहुँचाने की अपील मान ली थी.
उन्होंने कहा, "मगर अब मैं उस प्रतिबद्धता से मुक्त हूँ. अब अराफ़ात के बारे में मेरी कोई प्रतिबद्धता नहीं है." अमरीकी विदेश मंत्रालय के अनुसार वह अब भी अराफ़ात की हत्या की किसी भी योजना का विरोध करता है. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर के अनुसार, "अमरीकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. मैं बयान देखूँगा और फिर देखेंगे कि हम क्या कर सकते हैं." उधर अराफ़ात के एक सहयोगी नबील अबू रदेनेह ने शेरॉन को चेतावनी दी कि वह, "ख़तरनाक बयान नहीं दें क्योंकि इससे मध्य पूर्व में ख़तरा हो सकता है." |
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