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गुरुवार, 15 अप्रैल, 2004 को 17:33 GMT तक के समाचार
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बुश की घोषणा से अराफ़ात नाराज़
फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफात
अराफात ने कहा कि फ़लस्तीनी अपने स्वतंत्र राष्ट्र की माँग को कभी नहीं छोड़ेंगे
फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफात ने इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की विवादित मध्यपूर्व योजना का समर्थन करने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की कड़ी आलोचना की है.

एक टेलीवीज़न प्रसारण में अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए अराफात ने इस योजना को मानने से साफ़ इनकार कर दिया.

इस योजना के तहत इसराइल गज़ा पट्टी और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों से अपने सैनिकों को हटाने के बावजूद वहाँ यहूदी बस्तियाँ बनाए रखना चाहता है.

साथ ही उसका कहना है कि जो भी फ़लस्तीनी इसराइल में अपने घर छोड़ चुके हैं उनको अपने घर वापस आने की अनुमति नहीं होगी.

पश्चिमी तट की छह यहूदी बस्तियों में लगभग 90 हज़ार यहूदी रहते हैं.

यासिर अराफात ने कहा है कि उनके लोग हर हाल में अपने स्वतंत्रता के सपने को साकार करने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.

कुछ दूसरे प्रमुख फ़लस्तीनी नेताओं ने अरब राष्ट्रों और यूरोपीय संघ से अपील की है कि वे शांति की अंतरराष्ट्रीय रोडमैप योजना का समर्थन करें.

आलोचना

उधर इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की विवादित मध्यपूर्व योजना को समर्थन देने के लिए दुनियाभर में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की आलोचना हो रही है.

अरियल शेरॉन और जॉर्ज बुश
अरियल शेरॉन का समर्थन करने की वजह से राष्ट्रपति बुश की आलोचना हो रही है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति बुश का समर्थन इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच बातचीत रोकने की कोशिश है.

उन्होंने कहा कि कोई भी स्थायी शांति समझौता सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत दोनों पक्षों में बातचीत के आधार पर होना चाहिए.

फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने भी शेरॉन की योजना को बुश के समर्थन पर अपनी आपत्ति जताई है.

उनका कहना है कि राष्ट्रपति बुश अपने अधिकारक्षेत्र का उल्लंघन कर रहे हैं और इससे पूरे क्षेत्र की शांति पर असर पड़ सकता है.

क़ुरई का कहना था, "जब राष्ट्रपति बुश ने कहा कि 1967 की सीमाओं पर वापसी नहीं हो सकती तो वे पहले (अमरीकी) राष्ट्रपति बने जिन्होंने फ़लस्तीनी क्षेत्र में बस्तियों को वैध ठहराया."

शेरॉन की योजना का ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी स्वागत किया है मगर उन्होंने थोड़ी सतर्कता बरती है.

उनका कहना है कि यह योजना व्यापक शांति की दिशा में उठाया गया एक क़दम है.

फ़लस्तीनी वार्ताकार और मंत्री साएब अराकात ने भी अमरीका की आलोचना करते हुए कहा कि इस योजना से संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन होता है.

नीति में बदलाव

पर्यवेक्षक बुश के इसराइल को समर्थन करने को अमरीका की लंबे समय से चली आ रही नीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत मानते हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि यदि सब पक्ष इस मौके का फ़ायदा उठाएँ तो लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान हो सकता है.

अरियल शेरॉन इस समय अमरीका के दौरे पर हैं और बुधवार को राष्ट्रपति बुश ने शेरॉन की मौजूदगी में उनकी विवादित योजना पर उनकी पीठ थपथपाई.

बुश ने इस योजना को साहसिक और ऐतिहासिक तक कह डाला.

पर्यवेक्षकों के अनुसार राष्ट्रपति बुश ने फ़लस्तीनियों की उस राय को नज़रअंदाज़ किया है जिसके अनुसार नए देश का गठन 1967 की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए बातचीत के बाद होना चाहिए.

इसराइल ने 1967 में पश्चिमी तट और गज़ा पट्टी पर कब्ज़ा कर लिया था.

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